रांचीः झारखंड की राजनीति में हाल के दिनों में कई बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं. भारत निर्वाचन आयोग की ओर से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव तारीख का ऐलान करने के बाद सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. भारतीय जनता पार्टी की ओर से साफ कर दिया गया है कि इस बार पार्टी की ओर से किसी निर्दलीय को समर्थन नहीं दिया जाएगा, बल्कि पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारा जाएगा.भाजपा की ओर से राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारने के बाद कई संभावित उम्मीदवारों की चर्चा शुरू हो गई. लेकिन जिन नामों की चर्चा हो रही है, उन नामों में सबसे तेजी से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी निशा उरांव का नाम सामने आया है. (नीचे भी पढ़े)
लेकिन क्या भाजपा पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा की जगह निशा उरांव को उम्मीदवार बनाएगी? इसे लेकर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के कद्दावर नेता और विधायक रामेश्वर उरांव की बेटी निशा उरांव का नाम तीन संकेत के कारण तेजी से उभरा है. निशा उरांव का कहना है कि अनुसूचित जनजाति के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन नौकरी में 90 प्रतिशत आरक्षण धर्म बदलने वाले आदिवासियों को मिल रहा है. इसलिए उन्होंने क्रीमी लेयर की मांग का समर्थन किया. निशा उरांव ने भाजपा की नीतियों के अनुरूप डिलिस्टिंग का समर्थन किया है, यानी जो सरना आदिवासी धर्म बदल कर ईसाई या मुस्लिम धर्म अपना चुके हैं, उनका आदिवासियों का दर्जा समाप्त किया जाए. इसके अलावा आशा लकड़ा का नाम भी तेजी से चल रहा है. वह दो बार रांची के मेयर रह चुकी है. संगठन के कार्यों में काफी बढ़- चढ़कर हिस्सा लेती है. बंगाल चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी गयी थी, जिसका वह कर्तव्यनिष्ठा से पालन भी किया. जहां पर भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली.







