
रांची : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर भाजपा और समूचा विपक्ष के हंगामा के बीच सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में अपनी ओर से करारा जवाब दिया और विपक्षियों और भाजपा पर सीधे तौर पर निशाना साधा. मुख्यमंत्री ने सदन में कार्यवाही के दौरान परीक्षा परिणाम में धांधली के लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जेपीएससी परीक्षा में धांधली को लेकर धरना भाजपा करा रही है. नमक, तेल भाजपा पहुंचा रही है. विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता धरना पर बैठाये गये है. भाजपा सरकार ने सहायक की नियुक्ति पांच साल तक लटकारये रखा और जब हमारी सरकार ने पहली की तो जानबूझकर भ्रम फैलाकर लोगों को बरगलाया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार झारखंड में कमजोर वर्ग के छात्र चुनकर आये है. सामान्य कोटी के सीट पर भी एससी-एसटी और कमजोर वर्ग के लोगों को जगह मिल रही है तो आज मुनवादी सोच वाले नेताओं के पेट में दर्द हो रहा है. इस दौरान मुख्यमंत्री के भाषण का भाजपा के विधायकों ने विरोध भी किया. विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो के कहने पर भी लोग शांत नहीं हुए, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपना भाषण जारी रखा. उन्होंने कहा कि जेपीएससी स्वतंत्र संस्था है, इस कारण इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए. पिछली भाजपा की सरकार हमेशा हस्तक्षेप करती थी, जिस कारण कई लोग जेल गये थे. लेकिन हम ये बता देना चाहते है कि अगर कोई जेपीएससी में हमारी सरकार का अगर कोई हस्तक्षेप यहां के 81 विधायक में से कोई भी साबित कर देगा तो हम मान लेंगे कि गलती हुई है और जो बोलेंगे, वो कर देंगे, ऐसा हो ही नहीं सकता है. (नीचे देखे पूरी खबर)

भाजपाइयों ने किया सदन के अंदर और बाहर हंगामा, विधानसभा में जवाब देने को राजी हो गये मुख्यमंत्री
भाजपा सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जेपीएससी के पीटी परीक्षा में धांधली का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरु कर दिया. भाजपा विधायक सदन के बाहर तख्तियां लेकर नारेबाजी करते दिखे तो सदन के बाहर भी काफी देर तक वे लोग हंगामा करते रहे और सरकार का जवाब मांग रहे थे. जब हंगामा हुआ तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जवाब देने को कहा गया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सदन में हाजिर हो गये और जवाब देने को राजी हो गये, जिसके बाद हंगामा शांत हो पाया. हंगामा इस जवाब के पहले इतना हुआ था कि सुबह से शुरू हुई कार्रवाई को दोपहर 12.30 बजे तक रोक दी गयी थी. सदन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जवाब के बाद फिर से सदन को भोजनावकाश के लिए दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. इससे पहले सदन में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अमर बाउरी ने सवाल उठाया कि सदन चलने के बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बाहर में बयान दे रहे है, लेकिन सदन में बयान नहीं दे रहे हैं. भाजपा के विधायक भानु प्रतापह शाही ने जेपीएससी परीक्षा परिणाम को लेकर आंदोलन करने वालों को बाहरी और भाड़े का आदमी बताये जाने पर आपत्ति जतायी और हंगामा किया. जेपीएससी परीक्षा को रद्द करने की मांग की गयी. भाजपा ने यहां गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सीबीआइ की जांच की मांग की. भाजपा विधायक अमर बाउरी ने दोपहर बाद मुख्यमंत्री के भाषण के बाद कहा कि लगातार गड़बड़ियां जेपीएससी में हुई है. इस परीक्षा को सरकार को रद्द कर देना चाहिए. मुख्यमंत्री के भाषण के बाद भाजपा के विधायक ने कहा कि जेपीएससी में गड़बड़ी नहीं हुई तो पहले कुछेक परीक्षाओं को क्यों रद्द किया गया. इस कारण अभ्यर्थियों के साथ न्याय किया जाये और परीक्षा को रद्द कराकर नये सिरे से परीक्षा ली जाये. मैथिली, अंगिका जैसी भाषाओं को दरकिनार कर दिया गया, जो गलत है और इसका वे लोग विरोध करते है. उन्होंने कहा कि बांटने की राजनीति मुख्यमंत्री नहीं करें. बिहार से अलग होकर झारखंड बना था और मैथिली, अंगिका वालों ने क्या अपराध कर दिया. हिंदी को भी जगह नहीं दी गयी, यह अन्याय है. (नीचे देखे पूरी खबर)

विधायक लंबोदर महतो ने कहा ब्लैक लिस्टेड एजेंसी से करायी गयी परीक्षा
सदन की कार्यवाही के दौरान आजसू के विधायक लंबोदर महतो ने कहा कि जेपीएससी पर बिहार की एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी द्वारा परीक्षा का संचालन किया गया. विशेषकर सातवीं से दसवीं सिविल सेवा परीक्षा में धांधली का आरोप जो लगाया गया है, उसका जवाब कार्मिक प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग ने दिया और आरोप का खंडन किया. यह बताया गया कि इस परीक्षा का संचालन आउटसोर्स कंपनी से कराया गया है, जो बिहार सरकार में ब्लैक लिस्टेड है. इस आरोप का खंडन कार्मिक विभाग ने कहा कि ब्लैक लिस्टेड कंपनी से परीक्षा नहीं करायी गयी है. परीक्षा का संचालन जिले के उपायुक्त की देखरेख में की गयी थी.



