
रांची : झारखंड की सरकार पर फिलहाल खतरा टल गया है. कांग्रेस के नेता और विधायकों का दल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ रविवार की देर रात को मिला. लगभग गतिरोध सरकार में झामुमो और कांग्रेस के बीच खत्म हो गया है. इस बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम, मंत्री सह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव समेत अन्य लोग शामिल थे. बैठक में आपसी समन्वय बनाने की कोशिश की गयी और बताया गया कि कांग्रेस के एजेंडे को भी सरकार लागू करें. इस दौरान मजबूती से सदन में भाजपा का काउंटर करने की भी रणनीति तैयार की गयी. बैठक में यह भी कहा गया कि कांग्रेस के विधायक द्वारा अगर मुद्दे उठाये जा रहे है तो उसको नजर अंदाज नहीं किया जाये और पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दे दिया जाये कि त्वरित निष्पादन मामले का किया जाये. आपको बता दें कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महागठबंधन की बैठक विधानसभा के सदन के पहले बुलायी थी, लेकिन इस बैठक से कांग्रेस ने किनारा कर लिया था, जिसके बाद तत्काल यह कहा गया कि सरकार को भी खतरा हो सकता है, लेकिन इसको दरकिनार कर दिया गया और सरकार में समन्वय के साथ शामिल रहकर काम करने का फैसला लिया गया. इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री को ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण, बोर्ड निगम का गठन, जिसमें कांग्रेस की हिस्सेदारी ज्यादा देने समेत कई अन्य चुनावी घोषणा पत्र भी एक बार फिर से थमाये गये. सरकार के मुखिया हेमंत सोरेन को कांग्रेस ने कहा कि दो साल बीत चुके है. जनता और विपक्ष को रिजल्ट चाहिए, इस कारण कांग्रेस के मुद्दे को भी ठीक तरीके से सुना जाये और विधायकों के मान-सम्मान का ख्याल रखा जाये. इस दौरान हेमंत सोरेन ने कांग्रेस को आश्वस्त कराया कि किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी, कांग्रेस साझेदार सरकार में है और साथ ही चलेगी. इस बैठक के दौरान सीएम के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद, झामुमो नेता बिनोद पांडेय और सचिव पिंटू श्रीवास्तव समेत अन्य लोग मौजूद थे.





