
चाईबासा : झारखंड में महागठबंधन की हेमंत सरकार बन गई है और करीब एक माह बाद हेमंत सरकार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार भी कर दिया है. लेकिन अब कोल्हान प्रमंडल के ‘हो’ आदिवासी बहुल पश्चिमी सिंहभूम सरकार के प्रति काफी नाराजगी देखने को मिल रही है. हो बहुल क्षेत्र से हो विधायक को हेमंत सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करना क्षेत्र के लोगों व नव निर्वाचित विधायकों की उपेक्षा करने जैसी बात मानी जा रही है. जबकी पश्चिचमी सिंहभूम जिले से हो भाषा-भाषी चार चार विधायक हैं. इन विधायकों ने विधानसभा के सदस्यता की शपथ भी हो भाषा में ली थी. इसका उद्देश्य हो भाषा को बढ़ावा देना व संविधान की आठवीं अनुसूचि में हो भाषा को भी शामिल कराना था. आदिवासी हो समाज महासभा के पूर्व महासचिव मुकेश बिरुवा ने किसी भी हो विधायक के मंत्री नहीं बनाये जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. मुकेश बिरुवा ने कहा है कि हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में कोल्हान से किसी हो विधायक को मंत्रिमंडल के लायक नहीं समझना, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. जबकि कोल्हान में शायद ही कोई ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां हो समाज के लोगों के वोट बगैर किसी प्रत्याशी की जीत हुई हो. जो भी विधायक विजयी हुए हैं, सबकी जीत में हो समाज की भूमिका शीर्ष पर रही है. हेमंत सोरेन के उपरोक्त फैसले से हो समाज आहत हुआ है. ऐसे में समाज की भावना को दरकिनार करने के कारण शायद झामुमो को अगली बार नयी जगह की तलाश करनी पड़ेगी.







