
मेदिनीनगर (पलामू) : आदित्य विहंगम योगी प्रथम परंपरा सदगुरु आचार्य धर्मचंद देव जी महाराज की 101 वीं जयंती शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ मनायी गयी. विहंगम योग संत समाज की पलामू जिला इकाई के द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. छत्तरपुर प्रखंड के अरर खोड़ी स्थित आश्रम परिसर में जयंती समारोह का आयोजन हुआ. इस अवसर पर सुबह में शोभायात्रा निकाली गयी, जिसमें शामिल अनुयायी हाथों में अ अंकित श्वेत ध्वजा लेकर ध्वजा गान गाते हुए चल रहे थे. शोभायात्रा के बाद एकल कुंडीय विश्व शांति वैदिक महायज्ञ हुआ. आश्रम के विद्यार्थी सुनील कुमार ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन यज्ञ संपन्न कराया. यजमान के रूप में सत्यनारायण जायसवाल थे. इसके बाद भजन प्रवचन का कार्यक्रम शुरू हुआ.
मुख्य अतिथि संस्थान के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष राधाकृष्ण सिन्हा ने सदगुरुदेव के तस्वीर के समक्ष अखंड दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद माल्यार्पण किया.जयंती के अवसर पर अतिथियों एवं भक्तजनों ने सदगुरुदेव के तस्वीर पर फूलमाला अर्पित कर अपने सुखमय जीवन की कामना की. विशेष सत्संग समारोह में मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष श्री सिन्हा ने मानव जीवन के अध्यात्मिक विकास में ब्रह्म विद्या एवं सदगुरु की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला. कहा कि सदगुरु की दया से ही जीव का कल्याण होता है. ईश्वर असीम दया कर के जीव को देव दुर्लभ मानव शरीर देते है. लेकिन मानव जीवन का कल्याण सदगुरु के द्वारा होता है. ब्रह्म विद्या का ज्ञान सदगुरु के माध्मय से ही जीव को मिलता है.ब्रह्म विद्या विहंगम योग ईश्वर प्राप्ति का सहज एवं एकमात्र मार्ग है. विहंगम योग की साधना, सदगुरु की सेवा एवं सत्संग से ही आध्यात्मिक जीवन का निर्माण होता है. उन्होंने कहा कि परमात्मा सर्वशक्तिमान व सर्वव्यापक सत्ता है.परमात्मा की प्राप्ति एवं जीवन मुक्ति के लिए लोग प्राकृतिक पूजा करते है. लेकिन इससे परमात्मा की प्राप्ति नही होती. विहंगम योग ही ऐसा साधन है जिसके द्वारा मनोनिग्रह होता है. मनोनिग्रह के बिना आत्मा का कल्याण संभव नही है. सुख-शांति एवं जीवन के उदेश्य को हासिल करने के लिए सदगुरु शरणागत होकर ब्रह्म विद्या की साधना करनी चाहिए.
विशिष्ट अतिथि संस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद सिंह, यूपी सिंह एवं महामंत्री ललित कुमार सिंह ने विहंगम योग के सिद्धांत एवं प्रथम परंपरा सदगुरु के महान व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. संसारिक एवं आध्यात्मिक कल्याण के लिए ब्रह्म विद्या की साधना, सदगुरु की सेवा एवं सत्संग को आवश्यक बताया.कार्यक्रम का संचालन छतरपुर प्रखंड सेवा प्रभारी महेंद्र यादव ने किया. अनिल विश्वकर्मा ने भजन व सोहर प्रस्तुत किया. जयंती के अवसर पर भंडारा का आयोजन हुआ. इसमें जिले के सभी प्रखंडों से आये भक्तजनों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. मौके पर परामर्शक नंदलाल पासवान, सह संयोजक बनारसी प्रसाद यादव, यशवंत सिंह, कुबेर गुप्ता, अजय यादव, रामगोविंद यादव, अमलेश सिंह, रामगति चौधरी, ललेन्द्र सिंह, वैजनाथ जायसवाल, दुधनाथ जायसवाल, शिवनारायण जायसवाल, बालकेश्वर विश्वकर्मा, विश्वनाथ यादव, कईल यादव, चलितर विश्वकर्मा, प्रसाद विश्वकर्मा सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे.





