जमशेदपुर : टाटा संस के एमिरट्स चेयरमैन रतन टाटा बुधवार को 85 साल के हो गये. 28 दिसंबर उनका जन्मदिन है. उनके जन्मदिन पर उनको बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. लेकिन उनके जिंदगी से कई सारे अनछुई कहानियां है, जो लोग जानना चाहते है. ऐसे में शार्प भारत आपको बताने जा रहा है रतन टाटा कैसे इस्पात कारखाना में तपकर रतन बन गये और टाटा समूह के सर्वेसर्वा बने. (नीचे देखें पूरी खबर)

जमशेदपुर टाटा स्टील के ब्लास्ट फर्नेस में तपकर निकले- 28 दिसंबर 1937 को गुजरात के सूरत शहर में रतन टाटा का जन्म हुआ था. टाटा समूह को सुई से लेकर हवाई जहाज तक की कंपनी बनाने वाला बड़ा समूह माना जाता है. रतन टाटा का कैरियर की शुरुआत टाटा समूह में टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस से हुई थी. वे 1961 में जमशेदपुर आये. यहां वे आकर पूरे प्लांट को समझा. कामकाज और प्रबंधन के गुर सीखे. 1962 में वे टाटा इंडस्ट्रीज में असिस्टेंट के तौर पर काम करना शुरू किया. इसके बाद वे टाटा संस के डायरेक्टर बनाये गये. 1974 में डायरेक्टर बने के बाद वे 1975 में हारवर्ड बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरी की. इसके बाद 1986 में वे एयर इंडिया के चेयरमैन बने. फिर 1991 में टाटा समूह के चेयरमैन बनाये गये. इसके बाद वे टाटा समूह को लगातार ऊंचाईयों पर ले जाते रहे. (नीचे भी पढ़ें)

जमशेदपुर में बनाये है वे दो मकानों की डिजाइनिंग
टाटा संस के चेयरमैन रह चुके रतन टाटा जब 1961 में जमशेदपुर में थे तो उन्होंने यहां सर्किट हाऊस के रोड नंबर 10 इस्ट के दो बिल्डिंग की डिजाइन की थी. अमेरिकन परेरी स्टाइल की इन दो बिल्डिंग को खुद रतन टाटा ने डिजाइन किया था. इसमें से एक मकान टाटा संस के डायरेक्टर रहे जहांगीर गांधी के जीजा सोली देवितरे का था और दूसरा टाटा स्टील के एक्जीक्यूटिव रहे कैवास मेहतन और उनकी पत्नी पेरीन सी मेहता का था, जिन्होंने जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज की स्थापना की थी. इन दोनों के मकान की डिजाइन खुद रतन टाटा ने की थी. बाद में देवितरे के मकान को टाटा स्टील के पूर्व डिप्टी एमडी डॉ टी मुखर्जी ने खरीद ली और दूसरा मकान साकची के होटल मानसरोवर के परिवार से जुड़े त्रिलोक सिंह ने खरीद ली. यह दोनों मकान आपस में जुड़ा हुआ है. (नीचे भी पढ़ें)

रतन टाटा को भी हो गया था प्यार, शादी भले नहीं की
85 साल के रतन टाटा ने एक वक्त एक इंटरव्यू में कहा था कि जब तक आप बूढ़े नहीं हो जाते है, तब तक किसी को भी बूढे होने का मन बिलकुल नहीं करता है. अपनी लव लाइन पर दिये गये एक इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया था कि रतन टाटा को भी प्यार हुआ था. रतन टाटा के मुताबिक, जब वो लास एंजिलिस में थे, तो एक आर्किटेक्चर फर्म में काम करते थे. इस दौरान ही उनकी एक लड़की से मुलाकात हुई और प्यार हो गया. दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते थे. इस बीच रतन टाटा की दादी बीमार हो गयी. इसके बाद वे भारत आ गये. रतन टाटा को उस वक्त लगा कि वो जिस लड़की को चाहते हैं, वो भी उनके प्यार में भारत चलने के लिए तैयार हो जायेगी, लेकिन वो तैयार नहीं हुई क्योंकि 1962 का भारत चीन का युद्ध शुरू हो गया था. इसके बाद टाटा उस लड़की से अलग हो गये, लेकिन लड़की ने बाद में शादी कर ली. लेकिन रतन टाटा आज तक शादी नहीं की.



