
जमशेदपुर : आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व सोहराय 14 नवंबर से शुरू हो रहा है. इसके तैयारी में आदिवासी समाज के लोग जोर शोर से जुट गए हैं. पांच दिवसीय सोहराय पर्व को लेकर लोग घरों में साज सजावट और गाय व बैलों को सजा रहे हैं. मांझी परगना के दुर्गा चरण मुमरू ने बताया कि इस बार भी सोहराय पर्व पारंपरिक ढंग से ही मनाया जाएगा. लेकिन, कोरोना को ध्यान में रखते हुए कोई आयोजन नहीं होगा. अगर कोई देखने आएगा तो उसे भगा नहीं सकते. पहले दिन गोट बोंगा के अवसर पर ग्रामीण अपने-अपने गाय और बैलों को इकट्ठा करेंगे और शाम में उनके आगमन से पूर्व प्रवेश द्वार की साफ-सफाई कर सजाकर तैयार रखेंगे. दूसरे दिन गोड़ा बोंगा मनाया जाएगा. तीसरे दिन खुंटो बोंगा मनाया जाएगा. इस दौरान लोग अपने गाय और बैलों के साथ नृत्य कर खुशियों को बांटेंगे जबकि चौथे दिन गांव की महिलाएं व पुरुष एक टोली बनाकर एक-दूसरे के घर बांसुरी बजाते हुए जाएंगे. अंतिम और पांचवे दिन लोग अपने खेत की नई फसल निकाल खिचड़ी बनाएंगे. उन्होंने बताया कि गाय और बैल बेजुबान होते हैं और उनकी मेहनत से ही खेतों में फसल तैयार होती है. उनके साथ खुशियों को बांटने के लिए यह पर्व मनाया जाता है.






