
जमशेदपुर : वैश्विक संकट कोरोना का कहर अभी समाप्त नहीं हुआ है. लेकिन देश के बिगड़ते आर्थिक हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने लॉक डाउन में थोड़ी रियायत दे दी है. जहां कई उद्योग धंधे फिर से खोल दिए गए हैं, ताकि जनजीवन किसी तरह से पटरी पर आ सके. इन सबके बीच टाटा मोटर्स और कनवाई चालकों का विवाद एक बार फिर से सड़क पर आ गया है. जहां पिछले दिनों टाटा मोटर्स के कान्वाई चालक कंपनी गेट पर लॉक डाउन की अवधि में वेतन नहीं दिए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे थे. कन्वाई चालकों ने बताया कि कंपनी प्रबंधन ने पुलिस का खौफ दिखाकर उन्हें विरोध दर्ज करने से रोक दिया. वही आज एक बार फिर से कनवाई चालक जमशेदपुर जिला मुख्यालय पहुंचे जहां. इस आंदोलन में कांग्रेसी नेता फिरोज खान भी शामिल थे.
उन्होंने उपायुक्त से लॉक डाउन की अवधि का वेतन दिलाए जाने की मांग की. आंदोलन कर रहे कनवाई चालकों ने बताया कि इससे पूर्व उप श्रमायुक्त से कई बार उन्होंने लॉक डाउन की अवधि का वेतन कंपनी प्रबंधन से दिलाए जाने की मांग की, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने श्रमआयुक्त की बातों को दरकिनार कर दिया. उन्होंने बताया जिनकी वजह से टाटा मोटर्स वर्ल्ड क्लास कंपनी बनी है. आज उन कनवाई चालकों के साथ कंपनी प्रबंधन अमानवीय बर्ताव कर रही है. चालको ने साफ कर दिया कि उनका यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें लॉक डाउन की अवधि का वेतन नहीं दिया जाता है. कनवाई चालकों ने बताया कि करीब 900 कनवाई चालक हैं जिन्हें लॉकडाउन की अवधि में महज पांच हजार रुपए देकर कंपनी प्रबंधन ने पल्ला झाड़ लिया. आपको बता दें कि टाटा मोटर्स प्रबंधन और कनवाई चालकों का यह कोई पहला मौका नहीं है, जब दोनों का विवाद सड़क पर आया है. इससे पहले भी न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर टाटा मोटर्स प्रबंधन और कनवाई चालक आमने- सामने आ चुके हैं. ऐसे में अब देखना ये दिलचस्प होगा कि इस लड़ाई में जीत किसकी होती है. वैसे केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार मजदूरों और कामगारों को लॉक डाउन की अवधि का वेतन दिया जाना है.



