
जमशेदपुर : टाटा मोटर्स के सिक्यूरिटी ऑफिसर विशाल सिंह और आरके सिंह की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने वाले बाईसिक्स कर्मी आलोक रंजन का मामला दिनों दिन बढ़ती जा रही है। आलोक की विधवा नीतू सिंह ने परसुडीह थाना में दर्ज़ कांड संख्या 74/20 के अभियुक्तों की गिरफ्तारी में देरी और जाँच पर असंतोष जाहिर करते हुए डीजीपी को पत्र लिखा है। डीजीपी को लिखे गए पत्र में ज़िक्र है कि अभियुक्त रसूखदार लोग हैं तथा स्थानीय थाना स्तर पर अच्छी पकड़ रखते हैं। इनके ही प्रभाव में पीड़िता के शिकायत पर थाना पहले तो मामले में एफआईआर दर्ज़ करने से पल्ला झाड़ती रही बाद में डीजीपी के निर्देश और सिटी एसपी के हस्तक्षेप के बाद परसुडीह थाना में प्राथमिकी दर्ज़ हो सकी। पीड़िता ने आगे लिखा है कि अभियुक्तों के प्रशय पर लगातार केस उठाने की धमकियाँ मिल रही है और सोशल मीडिया पर कतिपय लोग महिला के चरित्र पर लज्जाजनक टिप्पणी कर दुष्प्रचारित कर रहे हैं। इन धमकियों और चरित्र हनन करने वाले कृत्यों से पीड़िता मानसिक रूप से थक चुकी है और बेहद परेशान है। जिक्र है कि धमकी देने वालों ने चेताया था कि अगर केस समझौता नहीं किया गया तो धनबल के बूते स्थानीय थाना को मैनेज कर के संज्ञेय धाराओं को हटवा लेंगे। इससे पीड़िता ने जाँच प्रभावित होने की आशंका व्यक्त करते हुए डीजीपी को पत्र लिखकर सिटी एसपी या किसी आईपीएस रैंक के अधिकारी से मामले की जांच कराने की मांग की है। आलोक रंजन की विधवा ने डीजीपी से अपने परिवार की सुरक्षा सहित अभियुक्तों की अविलंब गिरफ्तारी की माँग की है। इधर मीडिया को जारी बयान में पीड़िता ने कहा कि पति की मौत से उनका सबकुछ खत्म हो चुका है, उन्हें केवल और केवल न्याय चाहिए। अभियुक्त जबतक सरेआम बाहर रहेंगे जांच को प्रभावित करते रहेंगे, इससे न्याय नहीं मिल सकेगी।






