जमशेदपुर : टाटा स्टील के ट्राइबल कल्चरल सोसाइटी और सीएसआर के प्रयास से दिये जा रहे ट्रेनिंग के कारण आदिम जनजाति के बच्चों ने इस बार के झारखंड बोर्ड के मैट्रिक परीक्षा में बेहतर परिणाम दिया है. विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह (बिरहोर समुदाय) से 4 विद्यार्थियों ने बोर्ड की परीक्षा में शानदार सफलता पाई है. इन सभी विद्याथियों को टाटा स्टील के आकांक्षा प्रोजेक्ट के माध्यम से सपोर्ट किया गया था. प्रोजेक्ट आकांक्षा शिक्षा के क्षेत्र में एक अनूठी पहल है. यह प्रोजेक्ट आदिम जनजातियों के समर्थन पर केंद्रित है, जिन्हें अत्यंत पिछड़ी जनजातियां मानी जाती है और जो विलुप्त होने के कगार पर हैं. इन जनजातियों के लोगों का शिक्षा स्तर लगभग शून्य है. इनके अस्तित्व को बचाए रखने और विकास के उद्देश्य से किए गए अध्ययन से पता चला कि इनके बच्चों की शिक्षा की जरूरत महत्वपूर्ण है. वर्ष 2011 में 10 बच्चों को लेकर उन्हें आवासीय स्कूलों में दाखिला दिलाने की पहल के साथ प्रोजेक्ट आकांक्षा की शुरुआत की गई थी. इस संख्या में हर साल बच्चों की वृद्घि हुई. जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्र में सबर, बिरहोर और पहाड़िया जनजाति के 262 विद्यार्थी हैं. ये बच्चे 6 विभिन्न आवासीय स्कूलों में पढाई करते है. इन गांवों के बच्चों के माता-पिता को समय-समय पर आवासीय स्कूलों का दौरा कराया जाता है ताकि वे अपने बच्चों के बातचीत कर सकें औरउन्हें अपने जीवन में उच्च उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित कर सकें. इस वर्ष 4 बच्चों ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल की बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में हिस्सा लिया. सभी बच्चों ने अच्छे अंक हासिल कर उर्तीण हुए.
इन बच्चों ने पाई सफलता
कारमेल स्कूल, चक्रधरपुर (पश्चिम सिंहभूम) से तीन छात्राएं
सुश्री बालिका बिरहोर, 82़8, पुत्री-सुबोबिरहोर, गांव-छोटाबांकी
सुश्री रोहिणी बिरहोर, 719, पुत्री -सुनीलबिरहोर, गांव-छोटाबांकी
सुश्री सोनमुनि बिरहोर, 71़2: पुत्री-सोनीरामबिरहोर, गांव-छोटाबांकी
सिदो-कान्हू शिक्षा निकेतन स्कूल, डिमना (पूर्वी सिंहभूम) से एक छात्र
करण बिरहोर, 63़4:, पुत्र-सुबो बिरहोर, ग्राम-छोटा बांकी








