
जमशेदपुर : टाटा स्टील में लीव बैंक को लेकर सोमवार को समझौता हो गया. एक जनवरी 2020 से इसको लागू कर दिया गया है. टाटा स्टील के वीपी एचआरएम सुरेश दत्त त्रिपाठी और टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद की मौजूदगी में समझौता पर हस्ताक्षर हुआ. इस समझौता पर मैनेजमेंट की ओर से चीफ आइआर जुबिन पालिया के अलावा यूनियन के महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय ने संयुक्त रुप से हस्ताक्षर किये. यह पूर्व घोषित था कि एक जनवरी 2020 से नया लीव बैंक को लागू किया जायेगा, जिसका लाभ आम कर्मचारी से लेकर ऑफिसर रैंक के ऑफिसरों को भी मिला करेगा. टाटा मोटर्स में यह सिस्टम पहले से लागू है, जिसकी तर्ज पर इसको लागू किया गया है. नये लीव बैंक को लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन के महामंत्री सतीश सिंह की ओर से पहले पहल की गयी थी, जिसको मैनेजमेंट और यूनियन ने अमलीजामा पहनाया और करीब डेढ़ साल की मशक्कत के बाद अंतत: इसको लागू कर दिया गया. टाटा स्टील में अभी कोई कर्मचारी किसी बीमारी से पीड़ित हो जाता है तो वह अनफिट हो जाता है और इलाज की वजह से उनकी सारी छुट्टियां समाप्त हो जाती है और उसको वेतन तक नहीं मिल पाता है, जिससे कर्मचारियों को काफी नुकसान हो जाता है और परिवार नारकीय जीवन जीने को विवश हो जाता है. इससे बचाने के लिए यह दूरगामी समझौता यूनियन ने किया है.
लीव बैंक स्कीम के तहत नया समझौता एक नजर में :
- सभी तरह के कर्मचारी और ऑफिसर इससे लाभांविंत होंगे
- सारे कर्मचारी या ऑफिसर, जो वर्तमान में कार्यरत है, वे इस स्कीम के दायरे में आ जायेंगे. सभी के निर्धारित छुट्टी में से आधा दिन (0.5 दिन) इस बैंक में जमा हो जायेगा. वर्तमान में कंपनी में 16400 कर्मचारी कार्यरत है, जो मिलकर एक साथ 8200 दिनों की छुट्टी लीव बैंक में पहले ही दिन जमा हो जायेगी. अगर बैंक में छुट्टी की संख्या 2500 से कम हो जाता है तो फिर से कंट्रीब्यूशन लेने को लेकर कमेटी फैसला लेगी.
- अगर कोई कर्मचारी को इस स्कीम में शामिल नही होना है तो वे लोग अपना नाम इससे वापस ले सकते है, जिसके लिए कर्मचारी या अधिकारी को इसके लिए आवेदन देना होगा
- इस लीव बैंक से वैसे कर्मचारी लाभांवित होंगे, जो बिना वेतन के दस दिनों से अधिक की छुट्टी मेडिकल कारणों से है और सारी छुट्टियां उनकी खत्म हो गयी है
- एक कर्मचारी को लीव बैंक डोनेशन का 50 फीसदी छुट्टी बिना वेतन के मिल जायेगी, एक माह से लेकर 120 दिनों तक दिया जायेगा. कर्मचारियों को इस दौरान बेसिक व डीए के समकक्ष का लाभ मिला करेगा
- कर्मचारी अपने पूरे सेवा काल के दौरान दो बार इसका लाभ ले सकता है
- कर्मचारियों को लीव बैंक में जितनी छुट्टी अपनी दान दी है, उसको अगर कोई ले लेता है तो उसको वापस भी करना होता है. इसके तहत कर्मचारियोंको 7 दिन का सिक लीव या कुल साल भर में बीमार होने का 50 फीसदी, जो भी कम होगा, उसको लौटाना होगा.
- अगर किसी कर्मचारी की मेडिकल के दौरान ही मौत हो जाती है तो उनकी छुट्टी वापस नहीं होगी और उनको पूरा पैसा मिल जायेगा करेगा. कोई कर्मचारी अगर किसी भी कारण से कंपनी से अलग हो जाता है तो उनकी छुट्टी जो बचा हुआ होगा, उससे उसका एडजस्टमेंट हो जाया करेगा
- लीव बैंक से दूसरी बार कोई कर्मचारी तब तक लाभ नहीं ले सकता है, जब तक 50 फीसदी छुट्टी को वह वापस नहीं करेंगे
- इस पूरे सिस्टम की देखरेख टाटा स्टील के वीपी एचआरएम की देखरेख में बनी एक कमेटी करेगी, जिसमें यूनियन और मैनेजमेंट के अधिकारियों की टीम रहेगी. यहीं कमेटी छुट्टी को मंजूरी भी देगी.





