
जमशेदपुर : टाटा स्टील के सीइओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) के भी राष्ट्रीय अध्यक्ष है. सीआइआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने केंद्र सरकार के पेश होने वाले आम बजट को लेकर एक लिखित सुझाव दिया है. उन्होंने अपने सुझाव में कहा है कि भारत सरकार वर्तमान में हर कारपोरेट कंपनियों से दो फीसदी सीएसआर की अनिवार्यता का नियम बनायी है, लेकिन उनका मानना है कि कोरोना को देखते हुए एक फीसदी अतिरिक्त सीएसआर का लेवी कंपनियों से लिया जाना चाहिए ताकि कोरोना का टीका का बूस्टर डोज सबको प्रदान किया जा सके और कारपोरेट कंपनियां इसके खर्च करने के लिए प्रोत्साहित हो. एमडी ने सीआइआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कहा है कि कोरोना को देखते हुए आर्थिक गतिविधियों पर लगाये गये प्रतिबंध को हटाया जाये और जिन राज्यों में यह प्रतिबंध लगाये गये है, वहां की राज्य सरकारें उस पर पुर्नविचार करें. उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया है कि ओमिक्रॉन का संक्रमण तेजी से नीचे आ रहा है और लोग ठीक भी तेजी से हो रहे है और अस्पतालों में बेड भी पर्याप्त संख्या में है, इस कारण कोई प्रतिबंध की अब जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि सीएसआर फंड में दो फीसदी के साथ एक फीसदी का अतिरिक्त कोविड सीएसआर की अनिवार्यता लागू की जानी चाहिए. इसकी राशि 12 माह में वसूली की जाये ताकि बूस्टर डोज आसानी से दी जा सके. इसके तहत अनुमोदित एनआरएनए और प्रोटीन आधारित बूस्टर डोज के आयात में तेजी आयेगी और समाज के सभी वर्गों को समय पर बूस्टर डोज मिल सकेगा. उन्होंने पत्र में लिखा है कि वर्ष 2022-2023 काफी उम्मीदों भरा होगा, जिससे देश के आर्थिक विकास और सुधार में तेजी आयेगी. उन्होंने कहा कि बूस्टर डोज और वैक्सीन लोग लेंगे तो संक्रमण का खतरा कम हो जायेगा और आर्थिक प्रतिबंध लगाने की स्थिति भी नहीं बन सकेगा. उन्होंने राज्य सरकारों से यह भी अपील की है कि वे प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में लॉकडाउन लगाने या आर्थिक प्रतिबंध लगाने की अपेक्षा उस क्षेत्र में गतिविधियों पर अंकुश लगाये, जहां संक्रमित मरीजों की संख्या ज्यादा है और यह भी तय होना चाहिए जब अस्पताल में 75 फीसदी बेड भर गये हो. टीवी नरेंद्रन ने केंद्र सरकार से अपील की है कि आगामी बजट में वैसी राष्ट्रीय योजनाएं लाये, जिससे निवेश आगे बढ़े और आर्थिक गतिविधियां तेज हो सके ताकि देश का विकास संभव हो सके. टीवी नरेंद्रन ने यह भी उम्मीद जतायी है कि 9.2 फीसदी विकास का दर भारत हासिल कर लेगा, लेकिन उसको लेकर तेज विकास की गति बढ़ायी जाये और कम समय में पूर्ण वसूली भी सुनिश्चित होना चाहिए. उन्होंने कहा कि श्रमिकों और छोटे उद्यमियों को नुकसान नहीं हो, इसको देखते हुए भी कदम उठाने की जरूरतर है. बड़े गैदरिंग को रोककर छोटे छोटे गैदरिंग और छोटी छोटी गतिविधियों को भी बढ़ाने पर बल दिया जाना चाहिए. इससे जीवन और आजीविका दोनों चल सकेगा.






