
जमशेदपुर : टाटा स्टील के ट्रेड अप्रेंटिस की बहाली को लेकर झामुमो के विधायक रामदास सोरेन, मंगल कालिंदी, संजीव सरदार और समीर मोहंती के तल्ख बयान का विरोध तेज हो गया है. खुद सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने ही इसका विरोध किया है और कहा है कि इस तरह का बयान देना बंद करें, बिहार-यूपी वालों के नाम पर राजनीति चमकाना बंद करें, यह तोड़ने की साजिश नहीं चलेगी जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सबको साथ लेने की बात कह रहे है. पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमिटी के महामंत्री सह प्रवक्ता अविनाश सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए झामुमो विधायकों द्वारा टाटा स्टील की अप्रेंटिस परीक्षा में शत-प्रतिशत झारखंड के बच्चों को नियोजित करने एवं बिहार, यूपी और अन्य राज्यों के बच्चों को इस अप्रेंटिस परीक्षा में शामिल नहीं करने या गैर झारखंडी बच्चों को टाटा स्टील में नियोजित नहीं करने की दी गई चेतावनी का कड़ा विरोध किया है और कहा है कि इस तरह के झामुमो नेताओं द्वारा दिए गए बयान से झारखंड में वर्षों से रह रहे लोगों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और झारखंड में अंतरकलह की स्थिति पैदा होगी. झामुमो विधायकों को सोचना चाहिए कि टाटा स्टील के 100 वर्षों के सफलतम औद्योगिक सफर को इस मुकाम तक पहुंचाने में देश के हर राज्य के लोगों ने अपना बहुमूल्य सेवा और योगदान दिया है, जिनमे बिहार और यूपी के लोगों की भूमिका सदैव अग्रणी रही है. निश्चत रूप से इन परीक्षाओं में झारखंड के लोगों को विशेष प्राथमिकता मिलनी चाहिये परंतु अन्य राज्यों, विशेषकर बिहार-यूपी के बच्चों के साथ भी नाइंसाफी ना हो क्योंकि टाटा स्टील को तरक्की की शिखर पर ले जाने में बिहार-यूपी के लोगों ने इस कंपनी में एक मेहनतकश मजदूर से लेकर प्रबंध निदेशक तक के पद को सुशोभित करते हुए अपने तन-मन और जीवन समर्पित किया है. अविनाश सिंह ने कहा कि बिहार-यूपी के बच्चों के साथ अगर अन्याय होगा तो इस इस गलत कार्य का जबरदस्त विरोध भी होगा. इसे किसी भी कीमत पर बरदाश्त नहीं किया जाएगा.
इसी तरह टाटा वर्कर्स यूनियन के सहायक सचिव सह यूथ इंटक के राष्ट्रीय महासचिव नितेश राज ने भी बयान दिया है. नितेश राज ने कहा है कि टाटा स्टील में ट्रेड अप्रेंटिस की बहाली कोई नयी बात नहीं है. लेकिन इस बार इस तरह का विरोध प्रदर्शन कर कंपनी को डराने की कोशिश करना गलत है. इस तरह बिहार और यूपी वालों के खिलाफ आवाज उठाना यह बताता है कि राज्य में नफरत की बीज बोने की कोशिश की जा रही है जबकि यह भूलना नहीं चाहिए कि झारखंड भी बिहार का ही हिस्सा रहा है. कंपनी ने पहले ही कह दी है कि जिसका डोमिसाइल होगा उसको ही बहाल किया जायेगा, फिर इस पर बेवजह की राजनीति करना गलत है. इसका हर स्तर पर हम विरोध करते है. इधर, मंगलवार को भोजपुरी नव चेतना मंच के अध्यक्ष सह आजसू नेता अप्पू तिवारी ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पूर्व में भी झामुमो विधायको द्वारा इस राज्य को अशांत करने का प्रयास किया जाता रहा है जो असफल रहा है. ये सिलसिला अभी पुनः जारी हो रहा है. ऐसे विधायको का शहर आगमन पर रोक लगाने पड़ेंगे क्योकि इनकी मानसिकता आपसी भाईचारा को खत्म कर राज्य को फिर से आग में झुलसाने का प्रयास कर रहे है. इससे पूर्व भी मंत्री चम्पई सोरेन द्वारा छठव्रतियों को भी व्रत करने से रोक लगाया गया था, लेकिन उनकी कुंठित मानसिकता सफल नही हो पायी. श्री तिवारी ने कड़े शब्दों में ऐसे जनप्रतिनिधियों के बयान की निंदा करते हुए कहा कि ये नही भूले की बिहार से अलग हुआ है. झारखण्ड और झारखण्ड में रहने वाले सभी इस राज्य के निवासी है. ये किसी के बाप की जागीर नही जो जब चाहे बाहर कर देंगे और जब चाहे अंदर करेंगे. अगर हिम्मत है तो एक बिहारी या यूपी वाले को बाहर करके दिखाए. साथ ही बेगैरत बयान देकर सुर्खिया बंटोरने वाले विधायक से इस राज्य का विकास नही हो सकता है. समय आने पर अहसास करा देंगे. इस राज्य को सींचने और संजोने में हम बिहार यूपी वाले अपने कितना खून पसीना बहाया है. विधायको को समझनी चाहिए टाटा स्टील में पूरे भारत वर्ष के लोग टाटा स्टील में कार्यरत है और आगे भी निरन्तर कार्य करेंगे.



