जमशेदपुर : टाटा स्टील ने अपने निवेशकों को लाभ देते हुए शेयरहोल्डरों को जबरदस्त लाभ पहुंचाया है. टाटा स्टील के एक शेयर के बदले 10 शेयर देने का फैसला निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर) ने लिया है, जिसके लिए रिकॉर्ड डेट तय कर दिया यगा है. इस रिकार्ड डेट के बाद शेयरहोल्डरों को एक शेयर के बदले दस शेयर मिलेंगे. टाटा स्टील अपने शेयरों को 1/10 के अनुपात में स्पिलट कर देगी, जिसका रिकॉर्ड डेट 29 जुलाई को तय कर दिया है. टाटा स्टील के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की हुई बैठक में मई माह में ही इसको मंजूरी दी गयी थी, जिसको अब जाकर लागू किया गया है. बोर्ड के मुताबिक, कैपिटल मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने, शेयरधारकों का आधार को बढ़ाने और छोटे निवेशकों के लिए कंपनी के शेयर आसानी से उपलब्ध कराने के लिए यह अहम फैसला लिया गया है. स्टॉक स्प्लिट का मतलब शेयर का विभाजन होता है. अगर आसान शब्दों में कहा जाये तो किसी भी एक शेयर को तोड़कर दो या उससे अधिक बना देना होगा. स्टॉक स्प्लिट के जरिये कंपनियां अपने शेयरों को एक से ज्यादा शेयरों में विभाजित करती हैं. बाजार के जानकारों का माना जाये तो आम तौर पर जब किसी कंपनी का शेयर काफी महंगा होता है तो छोटे निवेशक उसमें निवेश करने से कतराते हैं. ऐसे में इन छोटे निरएशकों को अपनी तरफ खींचने के लिए कंपनी स्टॉक स्प्लिट करती हैं. कई बार मार्केट में डिमांड बढ़ाने के लिए भी कंपनियां स्टॉक स्प्लिट करती हैं. टाटा स्टील के शेयर का वैल्यूएशन ज्यादा हो गयी है तो शेयर को दो हिस्सों में तोड़ा जाता है. अगर कोई कंपनी स्टॉक स्प्लिट करती है तो शेयरधारकों को उसके पास मौजूद हरेक शेयर के लिए एक अतिरिक्त शेयर दिया जाता है. इससे शेयरधारकों के पास से मौजूद शेयरों की संख्या दोगुनी हो जाती है. यह माना जाये कि किसी भी शेयरहोल्डर के पास एक कंपनी के 400 शेयर हैं और कंपनी स्टॉक स्प्लिट लाकर एक शेयर को 2 में तोड़ देती है तो शेयरधारक के पास अब कंपनी के 800 शेयर हो जायेंगे. हालांकि, उनके निवेश की वैल्यू पर इससे कोई असर नहीं होगा क्योंकि स्टॉक स्प्लिट करने से हरेक शेयर की वैल्यू आधी हो जाती है. कंपनी को शेयरों में लिक्विडिटी (नगदी) आती है. छोटे निवेशकों का रुझान बढ़ता जाता है. कीमत कम होने से भी शेयरों में तेजी की संभावना बढ़ जाती है. यहीं वजह है कि बाजार में अभी टाटा स्टील के शेयर ने धूम मचा दिया है.




