
जमशेदपुर : टाटा स्टील का पोंगा काफी फेमस है क्योंकि यह कंपनी की पहचान इस एरिया में है कि उससे लोगों को समय का पता चलता है. इस पोंगा को कर्मचारियों की छुट्टी के वक्त बजाया जाता है. लेकिन साल में एक दिन ऐसा होता है, जब टाटा स्टील यह पोंगा शाम 6 बजकर 29 मिनट पर बजाती है और उस वक्त टाटा वर्कर्स यूनियन भी भावुक रहता है. मौका होता है टाटा वर्कर्स यूनियन के भूतपूर्व अध्यक्ष प्रोफेशर अब्दुल बारी की हत्या के वक्त का. जब प्रोफेशर स्वर्गीय बारी की हत्या हुई थी, उनकी याद में यहां भी उनको पोंगा बजाकर श्रद्धांजलि दी जाती है. रविवार को टाटा वर्कर्स यूनियन द्वारा यूनियन के पूर्व अध्यक्ष और विख्यात मजदुर नेता प्रो अब्दुल बारी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई. टाटा वर्कर्स यूनियन के कांफ्रेंस रुम में अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी टुन्नु के नेतृत्व में उपस्थित सभी लोगों ने प्रो अब्दुल बारी के अमर चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. सभा को संबोधित करते हुए यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी ने कहा कि हमे प्रो अब्दुल बारी के जीवन से सीख लेते हुए दिखाए गए मार्ग पर चलने की जरूरत है. अध्यक्ष ने कहा कि प्रो बारी के मजार का एक बार पुनः अवलोकन किया जायेगा और उसके बाद आवश्यक कदम उठाया जायेगा. श्रद्धांजलि सभा में माइकल जॉन रिसर्च सेंटर के फैकल्टी और रिसर्च स्कॉलर डा एम एस सिंह “मानस” ने प्रो अब्दुल बारी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला. आयोजन में यूनियन के डिपुटी प्रेसिडेंट शैलेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष शहनवाज आलम, शत्रुघ्न राय, संजय सिंह, कोषाध्यक्ष हरि शंकर सिंह, सहायक सचिव अजय चौधरी और सरोज कुमार सिंह, जयदेव उपाध्याय और अन्य कर्मचारी उपस्थित थे. अंततः 6 बजकर 29 मिनट पर टाटा स्टील में प्रो अब्दुल बारी की याद में पोंगा बजा और दो मिनट का मौन रखकर सभा समाप्त हो गई. आपको बता दें कि पटना के फतुहा के पास 28 मार्च 1947 को जमशेदपुर से वापस लौटते वक्त प्रोफेशर बारी की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. उसके बाद से हर साल पोंगा बजाकर श्रद्धांजलि देने की परिपाटी है, जो आज भी बरकरार रखा गया है. 74 साल बाद भी परिपाटी बरकरार रखना बड़ी बात है. वैसे यह मैनेजमेंट व यूनियन के गहरे संबंधों को भी दर्शाता है.



