
रांची : देश के केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी व केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा गुरुवार को रांची पहुंचे. दोनों यहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिले तथा कॉमर्शियल माइनिंग को लेकर बैठक की. बैठक में उन्होंने कॉमर्शियल माइनिंग (वाणिज्यिक खनन) के फायदे बताये. वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पर आपत्ति जताते हुए पुनर्वास आदि के मसले पर बात की. गौरतलब है कि कॉमर्शियल माइनिंग को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लिये गये निर्णय के खिलाफ झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर किया है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. माना जा रहा है कि नोटिस मिलने के बाद मान-मनौव्वल की राजनीति के तहत प्रह्लाद जोशी रांची पहुंचे हैं. ताकि झारखंड सरकार केंद्र सरकार के फैसले पर सहमति जता दे और मामले को रफा-दफा कर दिया जाये. हालांकि बैठक की बात करें, तो केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी व जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने सीसीएल, बीसीसीएल और इसीएल की समीक्षा की. बैठक में उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भविष्य की तैयारियों पर मंत्रणा की और महामारी में कोरोना वारियर्स के अनुकरणीय प्रयासों की सराहना की. बैठक से पूर्व यहां पहुंचने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय मंत्री श्री जोशी व श्री मुंडा का स्वागत किया.

राज्य सरकार को हो चुका है करोड़ों का नुकसान
केंद्र सरकार ने पिछले सात वर्षों से कोयला और लौह अयस्क समेत सभी मेजर मिनरल पर झारखंड को मिलनेवाली रॉयल्टी का पुनरीक्षण नहीं किया है. इस वजह से बीते सात वर्षों में राज्य सरकार को लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. नियमानुसार, मेजर मिनरल पर मिलनेवाली रॉयल्टी का पुनरीक्षण प्रत्येक तीन वर्षों में होना चाहिए. रॉयल्टी का निर्धारण खनिज की कीमत के आधार पर होना चाहिए. फिलहाल, मेजर मिनरल से रॉयल्टी के रूप में राज्य सरकार को करीब 5,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष मिलते हैं. यह राज्य से निकाले जा रहे खनिजों की कुल कीमत का 14 प्रतिशत है. जानकारी के मुताबिक झारखंड सरकार केंद्र से खनिजों की रॉयल्टी प्रतिशत बढ़ा कर 20 फीसदी करने की मांग कर रही है. राज्य से निकाले जानेवाले खनिजों की कुल कीमत का 20 प्रतिशत रॉयल्टी के रूप में मिलने पर राजकोष में 7,000 करोड़ रुपये अधिक जमा होंगे. खनिजों की रॉयल्टी का पुनरीक्षण पिछली बार वर्ष 2012 में किया गया था. यूपीए-2 के कार्यकाल में 2011 में गठित 17 सदस्यीय अध्ययन समिति की सिफारिशों पर आधारित प्रस्ताव को मंजूर करते हुए मूल्य आधारित रॉयल्टी निर्धारण को मंजूरी प्रदान की थी. उसके बाद से खनिजों की रॉयल्टी का पुनरीक्षण नहीं किया गया है.








