
संतोष वर्मा
चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले के ईचा-खरकई डैम का कोई औचित्य नहीं है. इस डैम से किसी का भला होने वाला नहीं है. उल्टा नुकसान ही है. यह बात सांसद गीता कोड़ा ने कही. वे गुरूवार को तांतनगर प्रखंड के तुईबाना गांव में ईचा डैम निर्माण के विरूद्ध आयोजित आमसभा में कही. ईचा-खरकई बांध परियोजना डूब क्षेत्र ग्रामसभा समन्वय समिति के तत्वावधान में आयोजित इस आमसभा में विभिन्न डूब क्षेत्र से ग्रामीण आये थे. गीता कोड़ा ने कहा कि वे इस परियोजना को रद्द करवाने के लिए लोकसभा में आवाज उठाऊंगी. फिर भी बात नहीं सुनी जाती है तो इस डैम के खिलाफ इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा. इसकी जवाबदेही केंद्र सरकार की होगी. गीता कोड़ा ने कहा कि 16 मार्च को आयोजित डैम निर्माण रोको आंदोलन को उनका भी समर्थन है. उन्होंने कहा कि यह डैम निर्माण हर हाल में बंद हो जाना चाहिए. इससे कोई लाभ नहीं है. उल्टा इससे हमारा अस्तित्व व पहचान खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में मैं आपके साथ हूँ. आंदोलन जारी रखें. इसे कमजोर ना होने दें. उन्होंने कहा कि झारखंड की हेमंत सोरेन की सरकार से भी डैम रद्द करवाने की मांग की जाएगी. वर्ष 2013-2014 में जब झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार थी तो एक कमेटी बनी थी जिसमें मैं भी शामिल थी. कमेटी ने डूब क्षेत्र के बांध विरोधी संगठनों से वार्ता की थी. तत्कालीन हेमंत सोरेन की सरकार ने भी डैम रद्द करवाने का वादा किया था इसलिए उसके समक्ष भी मांग रखी जाएगी. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ डैम के खिलाफ नहीं है, बल्कि अस्तित्व व पहचान की लड़ाई है. इस परियोजना से तीन-तीन पीढ़ियाँ बुरी तरह प्रभावित हैं. इस डैम से करीब एक लाख की आबादी विस्थापित होगी. लेकिन उनके लिए कोई विस्थापन नीति तक नहीं है. यह डैम बना तो ग्रामीणों के अलावा हमारी मवेशी व संस्कृति भी खत्म हो जाएंगी इसलिए आंदोलन को जारी रखें. आज नहीं तो कल लक्ष्य जरूर हासिल होगा. डैम के खिलाफ एकजुटता बनाए रखें. डैम आंदोलनकारी डोबरो बुड़ीउली ने कहा कि डैम के विरुद्ध इस आंदोलन में हमारे विधायक व सांसदों का सहयोग भी अपेक्षित है. आज सैकड़ों गांवों के भविष्य पर डैम का खतरा मंडरा रहा है. ऐसे में हमारे जनप्रतिनिधि ही हमें बचाने नहीं आएंगे तो वो किस काम के? यदि दुख की इस घड़ी में हमारे चुने हुए जनप्रतिनिधि मदद नहीं करते हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में डोबरो बुड़ीउली ने कहा कि 24 फरवरी को डूब क्षेत्र के 26 गांवों की ग्रामसभाओं की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व 25 फरवरी को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को मांग पत्र स्पीड पोस्ट से भेज दिया गया है. बाकी ग्रामसभाओं की ओर से एक सप्ताह के अंदर भेजने की बात कही. बैठक में एक मांग पत्र भी सौंपा गया जिसमें 30 मार्च तक डैम रद्द करवा देने की मांग की गई है. ऐसा नहीं होने पर शाहीनबाग जैसा आंदोलन की धमकी दी गई है. आमसभा में 8 गावों के ग्रामीण मुंडा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे जिसमें विश्वनाथ तामसोय, डोबरो बुड़ीउली, साधो पुरती, सुरेन्द्र बुड़ीउली, रूप सिंह सिद्धू, कानू पुरती, दाशकन कुदादा, ओड़ेया सावैयां, हरीश चंद्र सावैयां, डोगोर तियू, सालुका बारी, बागा पुरती, पहलवान आल्डा, सुरा बुड़ीउली, वीरसिंह बुड़ीउली आदि शामिल हैं.
इन गांवों की ग्रामसभा ने सीएम को भेजी चिट्ठी
ईंचा-खरकई डैम के डूब क्षेत्र में आनेवाली ग्रामसभाओं ने राज्य सरकार का ध्यान खींचने के लिए चिट्ठी लिखने का अभियान चला रखा है. डोबरो बुड़ीउली ने बताया कि इस अभियान के 26 गांवों की ग्रामसभाएं झारखंड सरकार को चिट्ठी लिख चुकी हैं. इनमें राजनगर प्रखंड के बालीडीह, बांदोडीह, मझगांव, सरजोमडीह, दिवरीडीह, सोनापुसी, हेरमा, सीनी, महुलडीह, गुलिया व सोसो,बईडीह, सदर प्रखंड के बड़ा मौदी, कुरसी, बरकुंडिया, तुरामडीह, कंकुशी लादूबासा, बड़ा जयपुर, तुईबाना, तांतनगर प्रखंड के सीनी, इलीगाड़ा, मंझारी प्रखंड से बामेहुटुप, कदलबेड़ा तथा हरिबेड़ा गांव की ग्रामसभाएं शामिल हैं.







