
संतोष वर्मा
चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले में कहीं बुरुगेलीकेरा जैसा नरसंहार एसिया का सबसे बड़ी सारंडा के अगरवां और बूंडु जैसे गांव में वनभूमि पर कब्जा जमाने को लेकर इलाके में न हो जाए इसलिए पुलिस लगातार दोनों गांव के लोगों के संपर्क करने में जुटी है. जिले का सबसे बड़ा सारंडा जंगल की सीमा पर बीहड़ जंगल में बसे दो गांवों बुंडू और अगरवां के लोग जमीन विवाद (विवादित जमीन) में एक-दूसरे के खून के प्यासे बने हुए हैं. 2014 में अगरवां गांव के तीन लोगों की हत्या हो गई. इसका आरोप बुंडू गांव के लोगों पर लगा. इस मामले में आज भी कई लोग जेल की सलाखों के पीछे सजा काट कर रहे हैं. इसके बावजूद दोनों गांवों के बीच का जमीन विवाद गहराया हुआ है. एक बार फिर जमीन पर कब्जा जमाने को लेकर दोनों गांव के लोग आमने-सामने हैं. वही सौ एकड़ वनभूमि को लेकर दो गांवों में चल रही है तनातनी. अगरवां के लोग किसी भी कीमत पर जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है, वहीं बुंडू के लोग हर हाल में जमीन पर दखल चाहते है. अगरवां के लोगों का कहना है कि वे लोग तीन जान दे चुके हैं और भी जान देंगे, लेकिन जमीन नहीं छोड़ेगे. दिलचस्प बात यह है कि जिस 100 एकड़ जमीन पर दोनों गांव के लोग अपना-अपना दावा ठोक रहे हैं और पूर्वजों की बता रहे हैं, वह जमीन दोनों गांववालों की है ही नहीं. यह सारी वनभूमि वन विभाग की है. दोनों गांव के बीच इस वनभूमि पर कब्जा को लेकर पिछले एक दशक से विवाद जारी है. इस सिलसिले में 2014 में अगरवां गांव के तीन लोगों की हत्या भी हो चुकी है.

पुलिस मामले को सुलझाने में जुटी है
जमीन को लेकर दोनों गांवों में जारी तनातनी से पुलिस भी पूरी तरह वाकिफ है इसलिए पुलिस आशंकित है कि कहीं बुरुगेलीकेरा जैसा नरसंहार इस इलाके में न हो जाए. पुलिस लगातार दोनों गांव के लोगों के संपर्क में हैं. 25 फरवरी को टोंटो थाने में दोनों गांव के लोगों की बैठक बुलाई गई. लेकिन बुंडू गांव के लोग नहीं पहुंचे. दोबारा दोनों गांव की एक बैठक 29 फरवरी को रोआम में रखी गई है. इस बैठक में बुंडू और अगरवां गांव के अलावा आस-पास के चार-पांच गांवों के लोगों को भी बुलाया गया है. इस बैठक में जिला पुलिस के आलावा सीआरपीएफ, वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी भी शामिल होंगे. पुलिस की कोशिश है कि हर हाल में इस विवाद को खत्म कराया जाए.






