
जमशेदपुर : टाटा स्टील की निबंधित पुत्र-पुत्री संघ ने अपनी बहाली को लेकर अध्यक्ष को पत्र लिखा है और एक ज्ञापन भी सौंपा है. टिस्को ट्यूब निबंधित पुत्र-पुत्री संघ के पदाधिकारियों ने यह ज्ञापन सौंपा है. ज्ञापन देने वालों में बीरेंद्र कुमार, अप्पू, सुनीता रानी, सबिता रानी शर्मा, नीतिन मुखी, पूजा रानी महतो, प्रभा हेम्ब्रम, गीता गोप, अशोक पांडेय, निर्मल पांडेय समेत अन्य लोग शामिल है. इन लोगों ने अपने ज्ञापन में कहा गया है कि निबंधितों के नियोजन की परीक्षा 500 पदों के लिए ली गई थी. इस परीक्षा एवं इस परीक्षा से जुड़े सवाल पूछे गये है. इन लोगों ने पूछा है कि क्या टाटा स्टील मैनेजमेंट और टाटा वर्कस यूनियन इस बात की पूरी गारंटी लेता है कि इस पूरी परीक्षा में केवल 8 ही लोग कदाचार कर रहे थे. कदाचार करने वालो की संख्या 8 से ज्यादा नही थी ? इन कदाचार करने वालों में केवल 2 लोगो को ही परीक्षा केंद्र के गेट के बाहर पकड़ा गया, एक व्यक्ति भाग गया तथा इनमे से 5 लोग इतनी सुरक्षा के बावजूद बड़े आराम से परीक्षा कक्ष तक पहुंच गए और परीक्षा देने लगे. इन लोगों ने कहा कि टाटा स्टील मैनेजमेंट द्वारा जो सभी परीक्षार्थीयो को एडमिट कार्ड दिया गया, उस एडमिट कार्ड के प्रथम पृष्ठ पर हमारा रिफरेन्स नम्बर 5 अंको का था तथा एडमिट कार्ड के पीछे यही रिफरेन्स नम्बर 6 अंको का था. परीक्षा कक्ष में उपस्थित परीक्षा नियंत्रक ने भी इस 5 नम्बर वाले रिफरेन्स नम्बर को भरने के लिए कहा, जिसके कारण कई परीक्षार्थीयो से रेफरेन्स नम्बर भरने में गलती हुई. अब टाटा वर्कर्स यूनियन यह स्पष्ट करे कि हमारी परीक्षा के परिणाम का आधार हमारा रेफरेन्स नम्बर है या रोल नम्बर. कही रेफरेन्स नम्बर के गलती के कारण कई निबंधितो का परिणाम रोक दिया जाएगा तो नहीं. इन लोगों ने कहा है कि सभी परीक्षा केंद्रों पर यह बताया गया कि इस लिखित परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नही है, पर अलग-अलग समाचार पत्रों में ये खबर आ रही है कि प्रश्न संख्या 1-80 तक मे नेगेटिव मार्किंग है, केवल तार्किक प्रश्न संख्या 81-100 में नेगेटिव मार्किंग नही है. अगर इस परीक्षा में निगेटिव मार्किंग है तो उसका निर्धारण कैसे होगा, क्योंकि किसी किसी प्रश्नों के सेट में 81-100 (20), तार्किक प्रश्न थे और किसी किसी प्रश्नो के सेट में तार्किक प्रश्न 91-100 (10) थे. ऐसे में प्रश्न संख्या 81-100 वाले परीक्षार्थीयो को कम निगेटिव मार्किंग का सामना करना पड़ेगा. कुछ को 20 प्रश्नों पर लाभ मिल रहा है और कुछ को केवल 10 प्रश्नो पर, ऐसा क्यों ? आखिर सभी परीक्षार्थीयो के लिए तार्किक प्रश्नों की संख्या अलग-अलग क्यों रखी गई? इन लोगों ने यह भी कहा है कि टाटा वर्कर्स यूनियन को अच्छी तरह मालूम था कि इस परीक्षा में 42 वर्ष के निबंधित भी है, पर प्रश्न पत्र केवल 18 से 25 वर्ष के आयु वर्ग को देखकर तैयार किया गया. यह शायद भारत वर्ष का एक मात्र ऐसा एग्जाम था जिसमे ना तो जेनरल भौतिक, ना तो जेनरल रसायन औऱ ना ही जेनरल जीवविज्ञान के प्रश्न पूछे गए. अगर आज यूनियन में बैठा तमाम अधिकारीयो से भी ये पूछा जाए कि टाटा स्टील में सीएफओ कौन हैं ? वो इस प्रश्न का जबाब नही दे पाएंगे. एक ओर एनएस-1 के नन टेक्निकल ग्रेड में बहाली का आधार नॉकरी छोड़ो नॉकरी पाओ है, जिसमें कोई लिखित परीक्षा नही होती, वही दूसरी ओर इसी ग्रेड के लिए निबंधितो से लिखित परीक्षा ली जा रही है. इन लोगों ने कहा है कि निबंधितो के इन सवालों का टाटा वर्कस यूनियन जवाब दे, इस बहाली में हुए भ्रष्टाचार को देखते हुए या तो इस लिखित परीक्षा को निरस्त करे या फिर जल्द से जल्द एनइइटी (नीट) कंपनी में हम निबंधितो की नियोजन की प्रक्रिया शुरू करें.





