जमशेदपुर : जमशेदपुर के बंद पड़े केबुल कंपनी (इंकैब इंडस्ट्रीज) के मसले को लेकर सोमवार को एनसीएलएटी में सुनवाई हुई. एनसीएलटी कोलकाता में सदस्यों बलराज जोशी और रोहित कपूर के बेंच में इंकैब मामले की सुनवाई हुई. मजदूरों के अधिवक्ता ने बेंच को याद दिलाया कि पिछली सुनवाई के दौरान बेंच ने यह सुनिश्चित किया था कि वह पहले वेदांता के रिजोल्यूशन प्लान को सुनेगी उसके बाद बाकी के आवेदनों को. अधिवक्ता के आग्रह के बाद बेंच ने वेदान्ता के रिज्योल्युशन प्लान पर सुनवाई शुरू की. आरपी पंकज टिबरेवाल के अधिवक्ता ने सोमवार को सुनवाई के दौरान यह कहा कि वेदांता द्वारा 545 करोड़ रुपये का रेजोल्यूशन प्लान दिया गया है, जो पहले सिर्फ 110 करोड़ रुपये का था. उन्होंने बेंच को बताया कि इस रिजोल्यूशन प्लान को कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) ने 99 फीसदी वोट के साथ अनुमोदित किया है. आरपी के अधिवक्ता ने यह भी कहा कि वेदांता बड़ा नाम है और हम 545 करोड़ रुपये दे रहे हैं जिसमें मजदूरों का 15 करोड़ रुपये शामिल है. कंपनी को पुनर्जीवित करेंगे, जिससे बहुत लोगों के लिए रोजगार पैदा होगा. अतः बेंच इंकैब के अधिग्रहण का आदेश पारित करे और मजदूरों के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव के लिए भी निर्देश जारी करें ताकि लगभग तीन हजार मजदूरों, जो इंकैब कंपनी की कॉलोनी पर कब्जा कर रह रहे हैं, उन्हें वहां से बेदखल किया जा सके. बेंच ने यह पूछा कि मजदूरों का दावा कितना है, इस पर मजदूरों के अधिवक्ता द्वारा बताया गया कि उनका दावा 254 करोड़ रुपये का है जिसमें आरपी ने मनमाने ढंग से 187 करोड़ रुपये स्वीकृत किया है और इस रिजोल्यूशन प्लान में मजदूरों के लिए मात्र 15 करोड़ रुपये की व्यवस्था है. समयाभाव के कारण आरपी के रिजोल्यूशन प्लान वाले आवेदन पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी. बेंच ने यह दोहराया कि कि वह सबसे पहले रिजोल्यूशन प्लान को सुनेगी और कोई भी आदेश पारित करने से पहले पिटीशन और बाकी तमाम आवेदनों को एनसीएलएटी और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के आलोक में सुनेगी. सभी अन्य आवेदनों जिसमें भगवती सिंह के कई आवेदन भी शामिल है, कि अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर 2022 की तारीख मुकर्रर की है. कर्मचारियों की तरफ से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव और आकाश शर्मा ने हिस्सा लिया.




