जमशेदपुर : टाटा स्टील नये बदलाव के दौर से गुजर रहा है. इस कड़ी में कर्मचारियों और अधिकारियों के काम में भी बदलाव होने वाला है. टाटा स्टील की वीपी एचआरएम अतरई सान्याल ने एक अखबार को दिये गये इंटरव्यू में इस बात की ओर इशारा किया है. उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में टाटा स्टील बड़ा और होगा. ऐसे में कर्मचारी को एक जगह से दूसरे जगह भेजा जा सकता है और उनकी उपयोगिता का लाभ दूसरे प्लाट में भी कंपनी ले सकती है. इसके अलावा टाटा स्टील में बहालियों का ट्रेंड भी बदल जायेगा. कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी को भी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. एक अखबार को दिये गये इंटरव्यू में टाटा स्टील की वीपी एचआरएम अतरई सान्याल ने कहा है कि टाटा स्टील अब बड़ा हो चुका है. पहले जमशेदपुर में सिर्फ प्लांट था. अब देश के कई हिस्सों में प्लांट हो चुका है. इस कारण सभी जगह बेहतर मैनपावर की जरूरत होती है. (नीचे भी पढ़ें)
उनकी योग्यता का इस्तेमाल दूसरे प्लांट में भी किया जा सकता है. चाहे कर्मचारी रैंक के हो या फिर अधिकारी रैंक के, उनका पदस्थापन कहीं भी किया जा सकता है. जो नयी बहालियां हो रही है, वह कहीं भी पदस्थापन के नियम के तहत ही बहाल हो रहे है जबकि पुराने कर्मचारी को भी अगर जरूरत होगी तो यूनियन से बातचीत कर बेजा जा सकता है. इसमें यूनियन को भी लचिला रवैया के साथ कंपनी को आगे ले जाने की सोच के साथ सहयोग करना होगा. वैसे यूनियनों ने काफी सहयोग किया है. उनके सहयोग से ही कंपनी आगे बढ़ी है और आगे भी बढ़ेगी. टाटा स्टील की वीपी एचआरएम ने इंटरव्यू में बताया है कि प्रोडक्टिविटी को बढ़ाना बड़ी चुनौती है. इस चुनौती को लेकर कंपनी के प्रबंधन और यूनियन को साथ मिलकर काम करना होगा और यह हो भी रहा है. वर्ल्ड में प्रोडक्टिविटी 2000 टन क्रुड स्टील का उत्पादन प्रति कर्मचारी का है. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने बताया कि अभी टाटा स्टील में 885 टन क्रूड स्टील का प्रोडक्टन प्रति कर्मचारी होता है. इसको हर हाल में टाटा स्टील चाहती है कि 1000 टन क्रूड स्टील प्रोडक्शन प्रति कर्मचारी ले जाया जाये. उन्होंने बताया कि टाटा स्टील के कलिंगानगर प्लांट में 950 के करीब है. लेकिन जमशएदपुर में यह कम है, लेकिन इसको भी आगे ले जाना है और इस लक्ष्य को हासिल किया जाना है. इंटरव्यू में कहा है कि अब आने वाले समय में बहालियां कई चीजों को देखकर होगी. कार्बन उत्सर्जन को कम करते हुए नेट जीरो के लक्ष्य को हासिल करना है. इस लक्ष्य में जो भी सहायक होगा, डिजिटल फ्रेंडली होगा, उनकी ही बहाली में प्राथमिकता होगी. ऐसे लोगों को ही बहाल किया जायेगा. इसके अलावा डाइवर्सिटी के तहत महिलाएं, ट्रांसजेंडर, आदिवासी और वंचित समाज के लोगों को बहाल किया जायेगा. जो लोग भी कंपनी में नौकरी करना चाहते है, उनको यह मन में रखना होगा कि उनको टाटा स्टील के किसी भी प्लांट में भेजा जा सकता है, चाहे कर्मचारी स्तर के लोग हो या फिर अधिकारी स्तर के, काम कहीं भी करना पड़ सकता है.



