
पुरुलिया : साजिश के तहत साढ़े तीन साल की बच्ची के शरीर में सात सुई घोपने एवं दोनों हाथ को तोड़कर निर्मम हत्या के मामले में सनातन गोस्वामी एवं सनातन को मदद करने के लिए बच्ची मां मंगला गोस्वामी को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई गयी है. यह फैसला पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला अदालत के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज-2 रमेश प्रधान ने सुनायी. इसके साथ दोनों को 50 हजार रुपये जुर्माना भी चुकाना पड़ेगा. जुर्माने की रकम नहीं चुकाने पर एक-एक साल अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि मां की गोद ही बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित होती है, लेकिन वहीं मां अपनी बच्ची को मारे यह गंभीर से गंभीर अपराध की श्रेणी है, जिस कारण उसको मौत की ही सजा दी जायेगी. सरकारी अधिवक्ता अनवर अली ने पत्रकारों को बताया कि इस मामले में कुल 37 गवाहों के बयान एवं सबूत के आधार पर न्यायाधीश ने यह सजा दी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार पुरुलिया मुफस्सिल थाना के अंतर्गत नदीयाड़ा गांव में साढ़े तीन साल की बच्ची को सर्दी, बुखार एवं खांसी की वजह से 11 जुलाई 2017 को पुरुलिया सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बच्ची के शरीर में जख्म के निशान देखकर एक मेडिकल बोर्ड का गठन पुरुलिया सदर हॉस्पिटल प्रशासन ने किया एवं जांच की गयी. मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद पता चला बच्ची का दोनों हाथ तोड़ा गया है. इसके साथ-साथ बच्ची के शरीर में विभिन्न जगहों पर कुल सात बड़ी सुई चुभायी गयी है. इसके बाद 13 जुलाई को चाइल्ड लाइन एवं जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सदस्यों ने नदीयाड़ा गांव में जांच-पड़ताल कर पता लगाया. पता चला कि 30 वर्षीय मंगला गोस्वामी के पति ने उसको छोड़ दिया है. रिटायर्ड होमगार्ड जवान सनातन गोस्वामी की पत्नी कई साल पहले गुजर गई थी. सनातन ने लोगों को बताया था कि मंगला उसके घर में नौकरानी का काम करती है. 14 जुलाई को मंगला ने चाइल्ड लाइन के पास शिकायत में कहा था कि उसके सामने ही सनातन उनकी पुत्री के साथ अत्याचार करता था. तब चाइल्डलाइन ने यौन उत्पीड़न का मामला भी दर्ज किया. तब से सनातन फरार था. उसी दिन बच्ची को गंभीर हालत में बांकुड़ा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में रेफर किया गया. लेकिन बच्ची की हालत और बिगड़ गयी तो 15 जुलाई को उसे कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में रेफर किया गया. 18 जुलाई को चिकित्सकों ने बच्ची के शरीर से कुल सात सुई को सर्जरी करके निकाली. लेकिन 21 जुलाई को एसएसकेएम अस्पताल में बच्ची ने दम तोड़ दिया. इसी मामले में फैसला कोर्ट ने सुनाया. इस फैसले के बाद मां रोने लगी, लेकिन वहीं पर लोगों ने कहा कि सही फैसला हुआ है. इस तरह निर्दयता से घटना को अंजडाम देने वराले को इसी तरह की सजा होनी चाहिए.




