
देवघर : देश की धरोहर विश्वप्रसिद्ध देवघर के बाबाधाम को आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हो गया है. सोमवार को कृष्णजन्माष्टमी के मौके पर धर्मरक्षिणी सभा द्वारा आहूत बंद का व्यापक असर देखने को मिला. पूरे बाजार बंद रहे जबकि सार्वजनिक वाहनों का आना जाना भी प्रभावित रहा. इस दौरान बाबा मंदिर की सुरक्षा काफी कड़ी की गयी थी. भारी संख्या में पुलिस बलों को तैनात कर दिया गया था. इस दौरान लोगों ने जुलूस निकाला और जमकर हंगामा किया. सरकार के खिलाफ लोगों में काफी गुस्सा देखा गया. इस दौरान जमकर हंगामा हुआ. इन लोगों का कहना है कि 22 अप्रैल से मंदिर बंद है जबकि सभी चीजों को खोल दिया गया है. कोरोना के नाम पर मंदिरों को बंद कर सीधे तौर पर धार्मिक आस्था पर चोट पहुंचाया जा रहा है. (नीचे पूरी खबर पढ़े और आंदोलन का देखें वीडियो-video)
झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास ने की धार्मिक स्थलों को खोलने की मांग
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बयान जारी किया है. श्री दास ने कहा है कि झारखंड में धार्मिक स्थल छोड़कर सभी चीजें खुल गयी हैं. यह बात समझ से परे है. मंदिरों के नहीं खुलने से जहां धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, वहीं बड़ी संख्या में इनसे जुड़े लोग बेरोजगारी से शिकार हो गये हैं. उनके परिवारों का लालन-पालन मुश्किल हो गया है. देश के दूसरे शहरों में बड़े मंदिर भी भक्तों के लिए खोल दिये गये हैं. पुरी का जगन्नाथ धाम हो या उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर समेत अन्य प्रमुख मंदिर भक्तों के लिए खोल दिये गये हैं. आज मथुरा-वृंदावन, द्वारका सभी स्थानों पर कृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनायी जायेगी, लेकिन झारखंड में हेमंत सरकार के तानाशाही रवैये के कारण यहां के कृष्ण भक्त मायूस ही रहेंगे. झारखंड में द्वादर्श ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ मंदिर से जुड़े पूजारी व दुकानदार आंदोलन कर रहे हैं. मां छिन्नमस्तिका द्वार खुलाने के लिए लोग आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन इससे संवेदनहीन हेमंत सरकार का कोई सरोकार नहीं है. रघुवर दास ने कहा कि यह सही है कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है, लेकिन कोरोना नियमों का पालन करते हुए जब देश के दूसरे बड़े मंदिर खोले जा सकते हैं, तो झारखंड के मंदिर क्यों नहीं खोले जा रहे हैं. क्या हेमंत सरकार के पास कोविड प्रोटोकॉल को लागू कराने की क्षमता या योग्यता नहीं है. श्री दास ने मांग की है कि कोविड प्रोटोकोल का पालन कराते हुए मंदिरों व धार्मिक स्थलों को खोलने की अनुमति देनी चाहिए. सत्ताधारी दलों के नेताओं के स्वागत में कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ायी जाती हैं, उनक मंत्री भीड़ इक्कठा कर भाषण देते हैं, उस समय हेमंत सोरेन सरकार को कोरोना की याद नहीं आती है. उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. क्या तब कोरोना नहीं फैलता है. त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है. लेकिन तुष्टिकरण से पीड़ित हेमंत सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है. नवरात्र आने वाला हैं. एक महीने का ही समय बचा हुआ है, लेकिन नींद में सोई हेमंत सोरेन सरकार ने दुर्गा पूजा पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है. पूजा-पंडाल वाले उनसे आग्रह कर रहे हैं, लेकिन हेमंत सोरेन सरकार की प्राथमिकताएं दूसरी हैं. हेमंत सरकार के तानाशाही रवैये का हिंदू समाज विरोध करता है. सरकार ने शीघ्र कोई निर्णय नहीं लिया, तो भाजपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतर कर इसका विरोध करेंगे.





