जमशेदपुर : जमशेदपुर के बिष्टुपुर में हुई चर्चित वर्षा पटेल हत्याकांड में मंगलवार को फैसला आ गया. जमशेदपुर कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सह जिला जज अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने वर्षा पटेल की हत्या के मुख्य आरोपी झारखंड पुलिस के असिस्टेंट पुलिस सब इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह को उम्र कैद की सजा सुनायी है. मंगलवार को सजा के बिंदू पर बहस होने के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि यह विश्वास की हत्या थी, पुलिस के अधिकारी, जिसको लोगों को सुरक्षा देना है, उसने ही हत्या की है, इस कारण उसको मौत की सजा सुनायी जानी चाहिए. इस दौरान बचाव पक्ष ने कम सजा देने की दलील दी. इसके बाद कोर्ट ने उसको उम्र कैद की सजा सुना दी. आपको बता दें कि 23 फरवरी को कोर्ट ने इस मामले में आरोपी को दोषी करार दिया था और 28 फरवरी को सजा को लेकर तिथि तय की गयी थी. मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 9 लोगों की गवाही करायी गयी थी. मोबाइल फोन पर की गयी बातचीत से लेकर वर्षा पटेल की बहन ने भी इस कांड में काफी बेहतर तरीके से केस को हैंडल किया, जिसके बाद उसको सजा सुनाया गया. परिस्थितिजन्य सबूतों की बदौलत उसको सजा दिलायी गयी. (नीचे भी पढ़ें)

क्या हैं मामला :
वर्षा पटेल 12 नवंबर 2021 से ही लापता थी. उस दिन उसकी बहन घर पर आयी थी. तब वहां के लोगों ने कहा था कि वर्षा 12 नवंबर को धर्मेंद्र की बाइक पर सवार होकर कहीं गयी है, तब से नहीं लौटी है. 14 नवंबर को भी वह घर नहीं लौटी तब एएसआई धर्मेंद्र को फोन किया. उसने कहा था कि वह जहां भी होगी आ जायेगी. एक सप्ताह के बाद 18 नवंबर की सुबह टेल्को थाना क्षेत्र के तार कंपनी तालाब से वर्षा का शव बरामद हुआ था. शव से दुर्गन्ध आ रही थी. जया ने ही शव की पहचान की वर्षा पटेल के रूप मे की थी. शव एक निला रंग की प्लास्टिक का बोरा में लपेटा हुआ था. गले में सोने की चेन थी और पीले रंग का शूट पहनी हुई थी. वहां पर पुलिस ने मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट बनाया था जिसपर जया ने अपना हस्ताक्षर भी किया था. शव देखकर जया ने कहा था कि मेरी बहन की हत्या एएसआई धर्मेंद्र सिंह ने ही की है और साक्ष्य छुपाने की नीयत से तालाब में फेंक दिया था. (नीचे भी पढ़ें)

बेटी की हत्या के दोषी को उम्रकैद मिलने से खुश है उसकी मां
इस हत्याकांड के आरोपी को सजा दिये जाने से स्वर्गीय वर्षा पटेल की मां लक्ष्मी पटेल के दिल को थोड़ी ठंडक पहुंची है. उनकी मां ने एक प्रेस बयान जारी कहा है ”मैं और मेरा पूरा परिवार न्यायालय के फैसले से खुश हैं. मुझे प्रारंभ से ही न्यायालय पर विश्वास था. मेरी बेटी तो वापस नही आ सकती है, लेकिन ऐसा करने वाले आरोपी को हमने संघर्ष कर सजा दिलाई और उसको उसके किये का फल मिला. ये लड़ाई हमने बहुत संघर्षों से लड़ा, इतने लंबे दिनों में मेरी यह लड़ाई सिर्फ आरोपी से नही बल्कि इस सिस्टम से भी रही. कुछ पुलिस पदाधिकारी का इस मामले में उतना सहयोग नही मिला, जितनी हमें आवश्यकता थी और उन्होंने दबे स्वर में ही सही, परंतु आरोपी के खिलाफ नरम रुख रखा. कुछ पुलिस पदाधिकारियों ने अपने गलत और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी से हमारे परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा भी धूमिल करने की कोशिश की. पुलिस के वरीय अधिकारियों ने सिर्फ आरोपी पक्ष की बात को सुनकर अपना विचार रखा. उन्हें हमारा पक्ष भी जानकर बातों को रखना चाहिए था. ये कोई प्रेम-प्रसंग का मामला नही था, इसमें दोस्ती और भरोसे का गलत फायदा उठाकर बातों को ना मानने पर इस घटना को अंजाम दिया. मेरी बेटी जो अब इस दुनिया में नही रही, उसकी कमी मुझे जीवन भर महसूस होगी. मेरी बेटी पढ़ाई में अच्छी होने के कारण कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी. वो आने वाले कल की भविष्य थी और प्रशासनिक पदाधिकारी बनना चाहती थी. एक स्वाभिमानी, पढ़ी-लिखी, निडर, सच्ची लड़की और दूसरों के मदद में आगे रहने वाली मेरी बेटी के बारे में मीडिया में गलत जानकारी के माध्यम से अफवाहों को चलाया गया, जिससे मुझे और मेरे परिवार को काफी पीड़ा हुई. लेकिन लड़ाई बड़ी होने के कारण हम विचलित नही हुए और भगवान पर भरोसा रखकर सबकुछ सहने की कोशिश की. इस लड़ाई में आप जैसे मीडिया के अच्छे लोगों ने इस तरह के दरिंदों से लड़ने की हिम्मत दी. मेरी इस लड़ाई में मेरा साथ देकर मुझे सहारा और हिम्मत देने वाले आप सभी लोगों को धन्यवाद कहती हूँ और भगवान से प्रार्थना करती हूं कि जीवन में किसी भी माँ को यह दिन देखना ना पड़े.” लक्ष्मी पटेल स्वर्गीय वर्षा पटेल की मां लक्ष्मी पटेल.



