
जमशेदपुर : जमशेदपुर शहर को नगर निगम बनाने या फिर औद्योगिक नगर बनाये जाने का मामला इन दिनो फिर से उबाल पर है. जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने इसको लेकर सोमवार को हुई राज्यस्तरीय मीटिंग को लेकर मंगलवार को मीडिया से मुखातिब हुए. वैसे आपको बता दें कि जमशेदपुर में टाटा लीज का एक बड़ा दायरा है और उसके बाहर की अधिकतर जमीन 86 बस्ती के अंतर्गत है, जिसको मालिकाना हक दिए जाने की मांग वर्षों से उठ रही है, लेकिन इसका समाधान आज तक नही निकल सका है और ना ही नगर निगम बनेगा या इंडस्ट्रियल टाउन, इस पर ही फैसला हो सका है.
वैसे पिछली सरकार ने बस्तियों को 30 वर्ष के लीज के आधार पर नियमित करने का पहल किया था. विधायक सरयू राय ने बातचीत के क्रम में कहा कि संविधान के नियमों के तहत जमशेदपुर को औद्योगिक नगरी बनाया जा सकता है, लेकिन इसे बनाने से पूर्व इसके लिए नियम तय होनी चाहिए कि जनता को इससे क्या-क्या लाभ मिलेगा और इन नियमों को बनाने के लिए एक विशेष कमिटी के गठन किया जाना चाहिए जिससे कि क्षेत्र की जनता को वो सारी सुविधाएं मिले जो औद्योगिक नगरी के तहत जनता को मिलती है. संविधान के मुताबिक ही सारा काम होना चाहिए. उन्होंने मीटिंग के औचित्व पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि भूमि राजस्व से संबंधित मामला था, लेकिन राजस्व सचिव को नहीं बुलाया गया था. नगर विकास सचिव के स्तर पर इस तरह की बैठक सिर्फ हो जाने भर से स्थिति ठीक नहीं हो सकती है, इसको लेकर समेकित तौर पर बैठक कर ठोस रणनीति बनाकर बातचीत कर जनता के हितों का पूरा ख्याल रखते हुए ही कोई फैसला होना चाहिए ताकि सबको लाभ मिल सके. बस्तियों को वापस टाटा लीज में मिलाने को लेकर भी श्री राय ने सवाल उठाये है.
सरयू राय द्वारा उठाये गये नगर निगम/औद्योगिक नगर के संबंध में कतिपय विचारणीय बिंदु :
- यह प्रावधान एक शहरी स्थानीय स्वशासन का एक अपवाद है.
- इसके अनुसार सभी प्रकार की नगरीय सेवायें औद्योगिक संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी.
- इसके अनुसार नगरीय स्थानीय स्वशासन के लिये काई लोकनिधि नहीं खर्च की जाएगी।
- अर्थात कोई लोकनिधि खर्च नहीं होगी इसलिये यहाँ स्थानीय स्वशासन नहीं होगा।
- जमशेदपुर को औद्योगिक शहर घोषित करने में कोई बाधा नहीं है, यदि
(क) टाटा स्टील सभी प्रकार के खर्च करता है
(ख) यदि टाटा स्टील हर प्रकार का व्यय करेगी, अतः सरकार कोई खर्च नहीं करेगी।
(ग) ऐसी स्थिति में सांसद निधि, विधायक निधि का क्या होगा।
(घ) सरकार नागरिक सुविधाओं के लिये कोई टैक्स नहीं ले सकेगी।
(ङ) टाटा स्टील भी लोगों से टैक्स नहीं ले सकेगी।
(च) टाटा स्टील बिजली नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर पर बिजली देगी।
(छ) टाटा स्टील जलापूर्ति भी सरकार द्वारा नगरपालिकाओं के लिये निर्धारित दर पर
देगी।
(ज) कोई नगर पालिका सेवा के लिये टाटा स्टील कोई शुल्क नहीं वसूलेगी क्यांेकि
यह संविधान सम्मत नहीं होगा।
(झ) उपायुक्त इसका अध्यक्ष नहीं हो सकता क्यांेकि इसमें कोई सरकारी धन
(लोकनिधि) का व्यय नहीं है। एक काॅरपोरेट घराने के उपक्रम का अध्यक्ष उपायुक्त
नहीं हो सकता।
(ञ) 86/140 बस्तियाँ टाटा लीज के अधीन नहीं हो सकती क्योंिक आयुक्त के अनुमोदन
पर सरकार ने इसे लीज से बाहर किया है। किसी भी व्यक्ति को तबतक सबलीज
नहीं दिया जा सकता जबतक सबलीज के मुकदमों में सरकार अपना रूख नहीं
तय करती।
- बिहार भूमि सुधार अधिनियम में इस हेतु किये गये संशोधन संविधान सम्मत नहीं है।
- टाटा लीज समझौता एवं लीज नवीकरण समझौता का कंडिका 8 असंवैधानिक है। इसके तहत सबलीज का प्रावधान है।
‘‘भारत का संविधान के प्रासंगिक प्रावधान’’
243 Q (c) a Municipal Corporation for a larger urban area, in accordance with the provisions of this Part:
Provided that a Municipality under this clause may not be constituted in such urban area or part thereof as the Governor may, having regard to the size of the area and the municipal services being provided or proposed to be provided by an industrial establishment in that area and such other factors as he may deem fit, by public notification, specify to be an industrial township.
243 थ (ग) किसी वृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का, गठन किया जाएगा:
परंतु इस खंड के अधीन कोई नगरपालिका ऐसे नगरीय क्षेत्र या उसके किसी भाग में गठित नहीं की जा सकेगी जिसे राज्यपाल, क्षेत्र के आकार और उस क्षेत्र में किसी औद्योगिक स्थापन द्वारा दी जा रही या दिए जाने के लिए प्रस्तावित नगरपालिक सेवाओं और ऐसी अन्य बातों को, जो वह ठीक समझे, ध्यान में रखते हुए, लोक अधिसूचना द्वारा, औद्योगिक नगरी के रूप में विनिर्दिष्ट करे.




