जमशेदपुर : भारतीय जन मोर्चा के जिला संयोजक रामनारायण शर्मा व जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा के संयोजक अजय सिन्हा ने भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार के द्वारा उपायुक्त के पास कागजी शिकायत किये जाने पर संयुक्त बयान के माध्यम से पलटवार किया है. उन्होंने कहा है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के घोर तानाशाही रैवये से तंग आकर जमशेदपुर पूर्वी की जनता ने सरयू राय को विजयी बनाकर उनके कुनबे को सुधरने का कड़ा संदेश दिया था। उनके वनभोज में मटन के लिए मारपीट हुई, वहीं दूसरी तरफ सरयू राय के मिलन समारोह में पूर्वी की जनता ने न सिर्फ भारी संख्या मे शिरकत की, बल्कि व्यवस्था की समूचित जिम्मेवारी अपने हाथों पर लेकर इसे ऐतिहासिक बनाया। रघुवर दास के कुनबे अपने को राजा समझते थे, राजपाट जाने के बाद भी अंहकार और ऐठन नहीं गयी। इसी अंहकार में जनता को पैर की धूली समझने वाले ने सरस्वती पूजा पंडाल का बांस (रघुवरनगर) उखाड़कर फेक दिया, वहां भी जनता विरोध में आवाज उठा रही है। परन्तु गुंडागर्दी करने की आदत जा नहीं रही है। उन्होंने कहा है कि जहां तक सोनमंडप की बात है, तो यह स्वाभाविक प्रक्रिया है। सरकारी फंड से पूर्ण निर्मित व्यवस्था का संचालन सरकार के नियामक के अनुसार होना ही चाहिए और यह हो रहा है तो कहीं से गलत नहीं है। यह तो एक उदाहरण भर है ऐसे ही सभी सरकारी फंड से पूर्ण निर्मित सामुदायिक भवनों की देखरेख की जिम्मेवारी सरकार को तय करनी चाहिए। रघुवर दास के कुनबे के प्रतिनिधि दिनेश कुमार भारतीय जनता पार्टी की आड़ में अपनी जमींदारी बचाने के लिए काल्पनिक एवं कागजी शिकायत करने गए थे, जिसे जमशेदपुर की जनता अच्छी तरह से समझती है। इनके कुनबे और जमींदारी में भागीदार रहे सहयोगियों द्वारा ऊंची इमारतें कैसे खड़ी की गई। इसका जवाब भी जनता को देना होगा। इनलोगों को समझ आ जाना चाहिए कि अब वे विधायक एवं मुख्यमंत्री नहीं हैं। वैसे में उनके कुनबे को जनता के फैसले को जल्द स्वीकार कर लेना चाहिए और ऐसी कुछ भी नहीं करना चाहिए कि उन्हें जनता का कोपभाजन बनना पड़े।






