
चाईबासा : पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में गुरु पूर्णिमा उत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष रामध्यान मिश्र तथा उनके साथ में कोषाध्यक्ष दिलीप कुमार गुप्ता एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार सिंह उपस्थित थे। इस कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि वेदव्यास और भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने समस्त आचार्य बंधु भगिनी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का उत्सव संपूर्ण भारत वर्ष में बड़े श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन महर्षि वेदव्यास को याद किया जाता है। वे हमारे जगत के गुरु थे जिन्होंने वेद, उपनिषद, पुराण और महाभारत जैसे बड़े ग्रंथों की रचना की। इसलिए उनको पूरा जगत गुरु मानता है। उन्होंने कहा कि जो अपने कर्म से बड़ा हो वास्तव में वही गुरु है। इस कसौटी पर महर्षि वेदव्यास खड़े उतरे थे। वही प्रधानाचार्य ने गुरु की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास का संपूर्ण जीवन से हमें प्रेरणा लेना चाहिए। वेदव्यास ईश्वरीय अवतार के साथ-साथ महान कवि,योगी, लेखक , तत्वदर्शी व साधक के साथ बड़े ज्ञानी थे। विद्यालय के साहित्याचार्य नरेश राम ने गुरु की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास सच्चे अर्थों में जगद के गुरु थे। उन्होंने अपने कर्म एवं साधना से स्पष्ट कर दिया कि गुरु का स्थान ईश्वर से सर्वोपरि है। आचार्य उमाशंकर जी ने भी गुरु की महता को उद्धृत किया। उन्होंने कहा कि गुरु की महिमा को शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता है। गुरु वास्तव में महान होते हैं जिनके छत्रछाया में बालकों के सभी पक्षों का निर्माण होता है। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुरेश कुमार, संजय कुमार, अयोध्या पांडे, नारायण चंद्र डे, रितेश गुप्ता, सतिकांत ठाकुर, छाया विश्वकर्मा, विभा सिंह, अंजली महतो, मनीषा नाई, सुमित्रा बास्के, सुनीता कुजुर, यमुना कोया आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन मंजू श्रीवास्तव ने किया। शांति मंत्र के साथ उक्त गुरु पूर्णिमा उत्सव का समापन हुआ। कार्यक्रम के अंत में आचार्य, बंधु, भगिनी के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।







