गालूडीह: उलदा में स्थित माता वैष्णो देवी धाम परिसर में शनिवार शाम स्वामी हिदयानंद गिरी महाराज जम्मू के श्रीमुख से श्री शिव पुराण कथा का भव्य आयोजन किया गया. पूजा अर्चना कर शिव महापुराण कथा का शुभारंभ किया. प्रथम दिन शिव पुराण कथा श्रवण करने काफी दूर-दूर से भक्तजन कथावाचक को सुनने के लिए वैष्णो देवी धाम पधारे थे. स्वामी हिदयानंद गिरी ने शिव महापुराण कथा के प्रथम दिन मनुष्य को एक-दूसरे के प्रति प्रेम व सम्मान के भाव को रखने की बात कही. उन्होंने कहा कि माता-पिता का सम्मान व गुरूओं के आदर से ही हम जीवन में बेहतर मनुष्य साबित हो सकते हैं.(नीचे भी पढ़े)

लोग अपने हिसाब से जीवन जी रहे हैं. एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हैं. अपने कर्म के लिखे को भोलेनाथ की पूजा करके हटाने का प्रयास करना चाहिए न कि एक-दूसरे को नीचा दिखाने और हराने का कार्य करना चाहिए. आपको परिवार के साथ कैसे रहना है, यह आपको शिव पुराण सिखाता है. माता-पिता, गुरु के सामने और मंदिर में सिर झुकाने से आयु बढ़ती है. साथ ही उन्होंने नारद मोह और उनकी भक्ति का भी वर्णन किया. कहा कि महादेव ने जिस स्थान पर कामदेव को भस्म किया उसी स्थान पर नारद तप करने लगे. तप से कामदेव के भयभीत होने पर नारद को अभिमान हो गया कि उन्होंने काम पर विजय प्राप्त कर ली. (नीचे भी पढ़े)

भगवान विष्णु ने माया के द्वारा विश्व मोहिनी स्वयंवर में नारद को आसक्त देखकर वानर रूप दे दिया. जिससे कुपित होकर उन्होंने विष्णु जी को शाप दिया. विष्णु के अवतार भगवार राम को सीता वियोग में वानरों व भालुओं संग 14 वर्ष का जीवन यापन करना पड़ा. बताया कि मानव जीवन के कल्याण के लिए पुराण में नारद भक्ति श्रवण, कीर्तन, स्मरण, वंदना, पूजन और आत्म निवेदन का मार्ग है.



