नई दिल्ली : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सात करोड़ से भी ज्यादा सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण खबर आई है. ईपीएफओ ने अपने सदस्यों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है. यह फैसला उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके सदस्य की मृत्यु हो गई है. अब ईपीएफओ ने मृत्यु दावों (डेथ क्लेम) के निपटान की प्रक्रिया (सेटलमेंट प्रॉसेस) को पहले से ज्यादा आसान बना दिया है. (नीचे भी पढ़ें)
ईपीएफओ द्वारा जारी नए सर्कुलर के मुताबिक अब मृत सदस्य के पैसे अब उसके नाबालिग बच्चों के बैंक खाते में सीधे पैसे जमा कर दिये जाएंगे. इसके लिए अभिभावक प्रमाण पत्र (गार्जियनशिप सर्टिफिकेट) की भी जरूरत नहीं होगी. अभी तक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के किसी सदस्य की मृत्यु हो जाने पर उनके परिवार को पीएफ, पेंशन या बीमा के पैसे निकालने में बहुत परेशानी होती थी. उन्हें न्यायालय से अभिभावक प्रमाण पत्र बनवाना पड़ता था. ये सारे कागजात जमा कराने में कई महीने लग जाते थे. इससे परिवारों को आर्थिक परेशानी तो होती ही थी, दौड़-धूप भी खूब करना होता है. (नीचे भी पढ़ें)
ईपीएफओ ने इस बारे में 13 अगस्त 2025 को एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें कहा गया है – “इस प्रक्रिया को आसान बनाने और नाबालिग बच्चों को जल्दी भुगतान सुनिश्चित करने के लिए, यह निर्देश दिया जाता है कि यदि नाबालिग बच्चों के बैंक खातों में भुगतान किया जा रहा है तो किसी अलग अभिभावक प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है.” ईपीएफओ का कहना है कि वे चाहते हैं कि पैसा जल्दी मिले और बच्चों को बिना किसी परेशानी के उनका हक मिल जाए. (नीचे भी पढ़ें)
ईपीएफओ का कहना है कि ईपीएफओ के दावे का पैसा आसानी से निकल जाए, इसके लिए सदस्य के हर बच्चे के नाम पर अलग-अलग बैंक खाता खुलवाना होगा. इसके बाद पीएफ और बीमा के पैसे सीधे उसी खाते में जमा किये जाएंगे. एक बार क्लेम की राशि इस खाते में आ जाए, फिर उसे निकालने में कोई परेशानी नहीं होगी. ईपीएफओ में एक ईपीएफ फॉर्म 20 प्रचलन में है. इस खास फॉर्म का उपयोग मृतक ईपीएफ सदस्य के पीएफ खाते से पैसे निकालने के लिए होता है. इसे मृत सदस्य का नॉमिनी, कानूनी वारिस या अभिभावक भर सकता है. यह फॉर्म पीएफ खाते का फाइनल क्लेम करने के लिए होता है.



