लंदन : सुपरहीरो की बहुत से फिल्में आपने देखी होगी. सुपरमैन, स्पाइडरमैन जैसे काल्पनिक कैरेक्टर हम अक्सर फिल्मों में देखते है, पर इतिहास में पहली बार लंदन में ऐसे बच्चों का जन्म हुआ है. जिसे वैज्ञानिक सुपर बेबी की संज्ञा दे रहे हैं. इस बच्चे की सबसे खास बात यह है कि इसे कोई जेनेटिक बीमारी नहीं होगी और न ही उसके माता पिता से कोई जेनेटिक बीमारी उसे मिलेगी. साथ ही इस बच्चे में किसी भी प्रकार का नुकसानदेह और जानलेवा जेनेटिक म्यूटेशन नहीं होगा. दुनिया में आजतक जितने लोगों ने भी जन्म लिया है, उनमें उसके माता पिता का डीएनए है, परंतु इस बच्चे का डीएनए तीन लोगों के डीएनए से तैयार किया गया है. (नीचे भी पढ़ें)

ब्रिटेन की ह्यूमन फर्टिलाइजेशन एंड एंब्रियोलॉजी अथॉरिटी ने इस बच्चे के जन्म की पुष्टि करते हुए कहा है कि अबतक ऐसे पांच बच्चों का जन्म हो चुका है. इंग्लैंड में जन्मे इन पांच बच्चों के जन्म में आइवीएफ तकनीक का प्रयोग हुआ है. ब्रिटेन के अधिकारियों ने बताया कि एक प्रयोग के तहत इन बच्चों को जन्म दिया गया है. ब्रिटेन में जन्मे हर 200 में से एक बच्चे को माइट्रोकांड्रियल डिसऑर्डर होता है. इस तकनीक से बच्चों को ऐसी बीमारियों से बचाया जा सकेगा. जिस तकनीक से इन बच्चों का जन्म हुआ है उसे माइट्रोकॉड्रिंयल डोनेशन ट्रीटमेंट कहा जाता है. (नीचे भी पढ़ें)

2015 में ब्रिटिश सरकार से इस तकनीक को मान्यता मिली. इस तकनीक में अस्वस्थ माइट्रोकांड्रिया वाली महिला के अंडाणु से जेनेटिक मटीरियल लेकर स्वस्थ महिला के अंडाणु से मिलाया जाता है. दूसरी महिला का बाकी डीएनए हटा लिया जाता है. यह भ्रूण जिस गर्भ में पलता है, उस महिला की जेनेटिक बीमारियां बच्चे को नहीं होतीं. (नीचे भी पढ़ें)
हालांकि सभी वैज्ञानिकों की सोच इस प्रयोग पर एक जैसी नहीं है. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रयोग प्रकृति के नियमों से खिलवाड़ है. लंदन के स्टेम सेल विशेषज्ञ रॉबिन लोवेल बैद कहते हैं कि इन बच्चों के विकास को देखना दिलचस्प होगा. यह देखना दिलचस्प होगा कि व्यावहारिक रूप में यह तकनीक कितनी सफल होती है और बच्चे वाकई माइट्रोकोंड्रियल रोग से मुक्त रहते हैं या नहीं. साथ ही, भविष्य में उन्हें कोई और समस्या तो नहीं होती है.




