
जमशेदपुर : जमशेदपुर के 20 साल से बंद केबुल कंपनी (इंकैब इंडस्ट्रीज) को खोलने को लेकर एनसीएलएटी (नेशनल कंपनी एपीलेट ट्राइब्यूनल) में इंकैब के अपील की सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान हैरतअंगेज ढंग से एक कंपनी ट्रॉपिकल वेंचर की तरफ से एक अधिवक्ता ने हस्तक्षेप करते हुए अपीलेट ट्राइब्यूनल को बताया कि वे इस अपील की सुनवाई में पक्षकार बनना चाहते हैं क्योंकि इंकैब कंपनी पर उनका 227 करोड़ रुपये का बकाया है और इंकैब कंपनी की पुणे की संपत्ति उनके पास गिरवी है और उक्त संपत्ति के नीलामी होने की स्थिति में वे पक्षपात के शिकार हो जायेंगे. यह एक सनसनीखेज खुलासा था. ऐसा प्रतीत होता है कि कमला मिल्स, फस्का इनवेस्टमेंट और आरआर केबल के मालिक और इंकैब कंपनी पर अवैध कब्जादार रमेश घमंडीराम गोवानी ने इंकैब कंपनी के साथ बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया है और इंकैब की पुणे स्थिति परिसंपत्तियों को गिरवी रखकर अपने व्यवसाय के लिए त्रृण लिया है. इस प्रकार ऐसा लगता है कि रमेश घमंडीराम गोवानी ने इंकैब कंपनी में लगभग 500 करोड़ रुपये का घोटाला किया है. ज्ञातव्य है कि बंबई उच्च न्यायालय में ट्रॉपिकल वेंचर ने अपने इसी त्रृण के आधार पर एक मुकदमा दायर कर रखा है जो साल 2000 से अपूर्ण (पेंडिंग) है. लिक्वीडेटर शशि अग्रवाल और रमेश घमंडीराम गोवानी, जो लेनदारों की समिति में बहुमत में है, ने धोखाधड़ी कर एडजुडिकेटिंग ऑथोरिटी एनसीएलटी, कोलकाता से यह सब छुपाये रखा और एडजुडिकेटिंग ऑथोरिटी एनसीएलटी, कोलकाता से परिसमापन का आदेश पारित करवा लिया. इंकैब कंपनी के अधिवक्ताओं ने अपीलेट ट्राइब्यूनल को इससे अवगत कराया. सभी पक्षों को सुनने के बाद एनसीएलएटी ने ट्रॉपिकल वेंचर को अपना पक्ष एक एफिडेविट के माध्यम से फाइल करने को कहा और अगली तारीख 15 दिसंबर की मुकर्रर की. इंकैब के कर्मचारियों की तरफ से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, संजीव कुमार महंती और चंन्द्रलेखा ने बहस में हिस्सा लिया.





