जमशेदपुर : चंद्रयान 3 की लैंडिंग 23 अगस्त को होने वाली है. इस अभियान को सफल बनाने में वैज्ञानिक जी तोड़ मेहनत कर रहे है. इसी वैज्ञानिकों की टीम में युवा वैज्ञानिक आयुष झा भी है, जो जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित डीएवी बिष्टुपुर का छात्र रह चुका है. वह मूलत: चक्रधरपुर का रहने वाला है. उसके पिता ललन कुमार झा चक्रधरपुर के प्राइमरी स्कूल के टीचर थे जबकि मां विनिता झा हाउस वाइफ है. पश्चिम सिंहभूम जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय से उन्होंने दसवीं की पढ़ाई पूरी की और फिर डीएवी बिष्टुपुर से 12वीं की डिग्री हासिल की. आइआइटी जेइइ क्रैक करने के बाद उसका दाखिला तिवुवनंतपुरम के इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नॉलॉजी से ग्रेजुएशन की. फिर वह साइंटिस्ट के रुप में इसरो से स्पेस एप्लिकेशन सेंटर में 2016 में ज्वाइन किया. (नीचे भी पढ़ें)
उसने चंद्रयान 2 के रडार के डेवलपमेंट के लिए काम किया. इसके बाद वह चंद्रयान 3 के मिशन में भी शामिल हो गया. उसके लैंडिंग और रियूजेबल लांच वेहिकल मिशन पर वे काम करने लगे. अभी वे बंगलुरु में है और सेटेलाइट लांच होने के बाद सारा ऑपरेशन वहीं से हो रहा है. आयुष के पिता ललन झा ने कहा कि घर में पिता के टीचर होने के कारण पढ़ने लिखने का माहौल शुरू से रहा है. उनके बड़े भाई अभिषेक झा ने इंजीनियरिंग क की पढ़ाई की तो वह स्पेस साइंस से जुड़ने के लिए आयुष को राह दिखायी. आइआइटी जेईई की तैयारी भी करायी और केरल के स्पेस साइंस इंस्टीच्यूट में उसने पढ़ाई की. आयुष झा इसरो अहमदाबाद में रहते है और लैंडिंग ऑपरेशन के लिए पिछले माह से बंगलुरु में हैं. वे और पूरी टीम लगातार दिन रात मेहनत कर रही है. 23 अगस्त को चंद्रयान की लैंडिंग होनी है, जिसके लिए वह पूरी टीम मेंबर के साथ मेहनत कर रहा है.




