जमशेदपुर : तमाम प्रयासों के बाद भी केंद्र सरकार द्वारा ईपीएस 95 पेंशन स्कीम लागू नहीं की गई है. इसको लेकर देशभर में बुधवार को ईपीएस 95 नेशनल एजेंट कमेटी की ओर से रास्ता रोको आंदोलन किया गया. इसी कड़ी में जमशेदपुर में भी ईपीएस 95 पेंशनर्स ने रास्ता रोको आंदोलन चलाया. इस संबंध में जानकारी देते हुए जुस्को श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष रघुनाथ पांडे ने बताया कि देश के 70 लाख औद्योगिक, सार्वजनिक, सहकारी एवं निजी क्षेत्रों से सेवानिवृत्त कर्मचारी यानी ईपीएस -95 श्रेणी के पेंशनर्स जिन्होंने अपने सेवाकाल में देश के नवनिर्माण में अहम भूमिका निभाई, देश को समृद्ध बनाया. जिसमें न्यूनतम पेंशन 7,500 रुपये मासिक करने की मांग की गयी है. वही पेंशनर्स अत्यंत कम पेंशन राशि मिलने से दयनीय और मरणासन्न अवस्था में जीवन जी रहे हैं. ऐसे में भारत सरकार को अति महत्वपूर्ण मांग पर विचार करने की जरूरत है. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं नेशनल एजेंट कमेटी के सचिव कालिपद्दा ने बताया कि संगठन की ओर से पीड़ित ईपीएस 95 पेंशनर्स की आवाज को सरकार तक पहुंचा कर हम पेंशनर की उचित मांगों को मंजूर करवाने हेतु देशभर में पिछले 7 सालों से तहसील स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक विविध प्रकार के कई आंदोलन चला रहे हैं. एनएससी मुख्यालय पर 24 दिसंबर 2018 से क्रमिक अनशन जारी है. श्रम मंत्री के साथ एनएसी के प्रतिनिधियों की कई बैठकें संपन्न होने के बाद 4 मार्च 2020 एवं 5 अगस्त 2021 को सांसद हेमा मालिनी की अगुवाई में प्रधानमंत्री के साथ संगठन के प्रतिनिधियों की बैठक में वृद्ध पेंशनर को आश्वासन दिया गया, मगर आज तक वह लागू नहीं किया गया है. जिससे ईपीएस 95 श्रेणी के 70 लाख पेंशनर प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. (नीचे भी पढ़ें)
उल्लेखनीय है कि ईपीएएस- 95 के तहत आने वाले कर्मचारियों के मूल वेतन का 12 प्रतिशत हिस्सा भविष्य निधि में जाता है. वहीं नियोक्ता के 12 प्रतिशत हिस्से में से 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना में जाता है. इसके अलावा पेंशन कोष में सरकार 1.16 प्रतिशत का योगदान करती है. अभी इस योजना के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को न्यूनतम पेंशन हजार रुपये मासिक मिलती है. उनका कहना है कि 30 -30 साल काम करने और ईपीएस आधारित पेंशन मद में निरंतर योगदान करने के बाद भी कर्मचारियों को मासिक पेंशन के रूप में अधिकतम 2 हजार 500 रुपये ही मिल रहा हैं. इससे कर्मचारियों और उनके परिजनों का गुजर-बसर करना कठिन है.





