जमशेदपुर : द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का वक्तव्य कि आदिवासी मूल रूप से हिंदू हैं. आदिवासियों के लिए बिल्कुल अपमानजनक और धार्मिक नरसंहार या रिलीजियस जेनोसाइड जैसा है. यह संविधान कानून का भी उल्लंघन है. हिंदू मैरिज एक्ट -1955 और हिंदू सकसेशन एक्ट -1956 में आदिवासी शामिल नहीं हैं. जबकि सिख जैन और बौद्ध शामिल हैं. अतः जोर-जबर्दस्ती आदिवासियों को हिंदू घोषित करना और वनवासी कहना दुर्भाग्यपूर्ण है. सेंगेल इसकी निंदा और विरोध करता है. (नीचे भी पढ़ें और देखें वीडियो)
मगर सेंगेल आदिवासियों को विदेशी भाषा- संस्कृति और धर्म से बचने-बचाने का पक्षधर है. सालखन मुर्मू ने कहा है कि सिख, जैन, बौद्ध की तरह अपनी आदिवासी अस्तित्व, पहचान, हिस्सेदारी को कायम रखते हुए 2023 में हर हाल में सरना धर्म कोड की मान्यता के लिए कटिबद्ध हैं. सेंगेल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा है. सेंगेल बीजेपी और आरएसएस के साथ संवाद करते हुए इस दुविधा को दूर करने का आकांक्षी है. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि मरंग बुरू (पारसनाथ पहाड़) आदिवासियों का ईश्वर है. उसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 जनवरी 2023 को जैनों के हाथ लिखकर सौंपकर महापाप किया है. सेंगेल इसकी निंदा करता है. मरंग बुरू बचाओ भारत यात्रा जारी है. इसी क्रम में 31वां भारत यात्रा का पड़ाव ओड़िशा के मयूरभंज जिला में 6 से 9 मार्च 2023 को सघन जन जागरण किया गया. पूर्व सांसद सालखन मुर्मू और सुमित्रा मुर्मू के नेतृत्व में 9 मार्च 23 को बारीपदा में विशाल मशाल जुलूस निकाला गया. जिसमे 4 प्रदेश और ओड़िशा के 7 ज़िलों के सेंगेल नेता और सेंगेल माझी परगना शामिल हुए. (नीचे भी पढ़ें)
नवीन पटनायक सरकार को चेतावनी दिया गया कि 31 मार्च 2023 तक बंगाल, झारखंड की तर्ज पर सरना धर्म कोड बिल पास करें अन्यथा एक अप्रैल 2023 से 5 प्रदेशों में ओड़िशा सरकार का सर्वत्र पुतला दहन किया जाएगा. उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ कहा कि लूट, झूठ, भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी करने में विश्व रिकॉर्ड कायम करने वाली सरकार को बेनकाब और बेदखल करने की नियत से सेंगेल 5 प्रदेशों में 11 से 13 मार्च 23 तक सर्वत्र इसका पुतला दहन करेगा. 14 मार्च 2023 को रांची सेंगेल में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर सरना धर्म कोड की मान्यता, मरंग बुरू की वापसी और प्रखंडवार नियोजन नीति के क्रियान्वयन आदि के लिए राज्यपाल, झारखंड को ज्ञापन पत्र प्रदान करेगा.



