जमशेदपुर : एनसीएलएटी ने इंकैब (केबुल कंपनी) के कर्मचारियों द्वारा एनसीएलटी के 8 जनवरी 2025 के तमाम आदेशों के खिलाफ दायर अपील को दिल्ली में हुई सुनवाई के बाद स्वीकृत किया. सुनवाई के दौरान इंकैब कर्मचारियों के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने अपीलेट ट्राइब्यूनल, एनसीएलएटी को बताया कि कर्मचारियों की अपील तीन न्यायिक आदेशों पर आधारित है जिसकी रिजोल्यूशन प्रोफेशनल पंकज टिबरेवाल ने अवहेलना की है और एनसीएलटी ने भी त्रुटिपूर्ण तरीके इन न्यायायिक आदेशों को नहीं माना है. अधिवक्ता ने बताया कि पहला न्यायायिक आदेश है. दिल्ली उच्च न्यायालय का जिसमें अदालत ने व्यवस्था दी कि आरआर केबल्स और पेगाशस एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्राईवेट लिमिटेड का उद्देश्य जमीन कब्जा करने का है जबकि रिजोल्यूशन प्रोफेशनल पंकज टिबरेवाल ने रमेश घमंडीराम गोवानी की कंमनियों आरआर केबल्स, कमला मिल्स और फस्क्वा इन्वेस्टमेंट के साथ पेगाशस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को इंकैब कंपनी का वित्तीय लेनदार बना दिया. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने आगे बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने बैंकों और डिबेंचर होल्डर्स की कुल देनदारी 21.63 करोड़ तय कर दी पर कोई भी बैंक और डिबेंचर होल्डर्स एनसीएलटी नहीं आये और रिजोल्यूशन प्रोफेशनल पंकज टिबरेवाल ने कुटरचित तरीके से रमेश घमंडीराम गोवानी, पेगाशस एसेट रिकंस्ट्रक्शन और ट्रॉपिकल वेंचर्स को वित्तीय लेनदार घोषित कर उनका कुल अविश्वसनीय 4000 करोड़ रुपये का दावा मंजूर किया जबकि इंकैब कंपनी की कोई भा देनदारी नहीं है. सारी वित्तीय और अन्य देनदारियां अवधि बाधित होने के कारण समाप्त हो गये. उन्होंने कहा कि रिजोल्यूशन प्रोफेशनल पंकज टिबरेवाल इन फर्जी कंपनियों के एजेंट के तौर पर काम कर रहा है. अधिवक्ता ने आगे बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने टाटा स्टील को इंकैब कंपनी का अधिग्रहण करने को कहा था पर टाटा स्टील माननीय सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर कर कमला मिल्स, पेगाशस और ट्रॉपिकल वेंचर्स को बैंकों द्वारा तथाकथित रूप से बेचे गये. समय बाधित एनपीए को रद्द करने को कहा पर सर्वोच्च न्यायालय ने टाटा स्टील के एनसीएलटी में वह मामला ले जाने को कहा पर टाटा स्टील ने एनसीएलटी में कोई पिटीशन दायर नहीं किया तब इंकैब के कर्मचारियों ने एनसीएलटी में सेक्शन 9 का पिटीशन दायर कर इंकैब कंपनी के उद्धार की प्रार्थना की. (नीचे भी पढ़ें)
अधिवक्ता ने आगे बताया कि एनसीएलटी ने पहले मोराटोरियम जारी किया फिर उसके परिसमापन की घोषणा कर दी. कर्मचारियों ने एनसीएलएटी में अपील दायर किया और एनसीएलएटी ने न केवल उक्त परिसमापन आदेश को रद्द किया बल्कि रिजोल्यूशन प्रक्रिया और लेनदारों की समिति को अवैध घोषित करते हुए रिजोल्यूशन प्रोफेशनल शशि अग्रवाल को उसकी कुटरचित कार्यों के लिए हटा दिया और बाद में आइबीबीआइ ने जांच के बाद उसकी रिजोल्यूशन प्रोफेशनल बनने की अर्हता समाप्त कर दी. अधिवक्ता ने आगे बताया कि नया रिजोल्यूशन प्रोफेशनल पंकज टिबरेवाल ने वही बेईमानियां कर रमेश घमंडीराम गोवानी, पेगाशस और ट्रॉपिकल वेंचर्स जैसी बेईमान कंपनियों का 4000 करोड़ रुपये की लेनदारी स्वीकृत कर उन्हें लेनदारों की समिति का सदस्य बनाये रखा. रिजोल्यूशन प्रोफेशनल के अधिवक्ता ने दावा किया कि कर्मचारियों को ये अपील दायर करने का हक नहीं है जिसे अदालत ने खारिज करते हुए 3 उसे सप्ताह में हलफनामा दायर करने का आदेश दिया और पिटीशनर को 2 सप्ताह का वक्त रिज्वांईडर दायर करने के लिए दिया गया. अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी. कर्मचारियों के तरफ से अखिलेश श्रीवास्तव, आकाश शर्मा और रिशभ रंजन ने सुनवाई में हिस्सा लिया.



