
जमशेदपुर : आयुष्मान कार्ड होते हुए अस्पतालों का चक्कर लगाते-लगाते बच्चे की मौत का मुद्दा गरमा गया है. इस मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्विट कर पूरे मुद्दे पर सीधी कार्रवाई करने का आदेश उपायुक्त को दिया है और इस मामले में तत्काल रिपोर्ट मांगी है कि क्या कार्रवाई हुई है. यह कहा गया है कि डीसी पहले कार्रवाई करें और फिर सरकार को जानकारी दें कि कौन लोग दोषी है और पूरा मामला क्या है और उसके बाद सरकार और भी सख्त कार्रवाई करेगी. दूसरी ओर, जमशेदपुर के सांसद ने गोलपहाड़ी के 12 वर्षीय बच्चे की मौत पर संज्ञान लेते हुए मंगलवार को जमशेदपुर के उपायुक्त से मुलाकात की. जहां उन्होने बच्चे के मौत के लिए जिम्मेवार अस्पताल प्रशासन और सिविल सर्जन से पूरी रिपोर्ट तलब किया है.

सांसद विद्युत वरण महतो ने बताया कि आयुष्मान कार्ड रहने के बावजूद अगर बच्चे का ईलाज अस्पताल प्रशासन द्वारा नहीं किया गया है, तो गलत है. उन्होने बताया कि उनके द्वारा प्रति दिन गंभीर रोग से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए अनुशंसा की जाती है, इसके लिए उनके कैंप कार्यालय में तीन अतिरिक्त कर्मियों को नियुक्त किया गया है, ताकि बीमारी की वजह से किसी को दर- दर की ठोकरें नहीं खानी पड़े, ऐसे में कहां चूक हुई है, किसकी लापरवाही है, इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए. आपको बता दें कि कल जमशेदपुर के गोलपहाडी के एक बच्चे का ईलाज के अभाव में मौत हो गया था, जबकि बच्चे के पास आयुष्मान कार्ड मौजूद था. ऐसे में अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरते जाने का आरोप लग रहा है, इसको लेकर जमशेदपुर के कई संगठन भी अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं.

सिंहभूम विकास परिषद ने डीसी ऑफिस पर किया प्रदर्शन
दूसरी ओर, मानवता को शर्मशार करने वाली घटना के विरोध में मंगलवार को सिंहभूम विकास परिषद् के सदस्य जमशेदपुर जिला मुख्यालय पहुंचे. जहां इनके द्वारा जिले के उपायुक्त से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा. सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से परिषद् के सदस्यों ने बताया कि कल गोलपहाड़ी निवासी राजेश पात्रों के 12 वर्षीय पुत्र की इलाज के अभाव में मौत हो गई जबकि उनके पास आयुष्मान कार्ड भी था. इनके द्वारा जमशेदपुर के उपायुक्त से वैसे निजी अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की है, जिन्होंने इलाज में कोताही बरती और आयुष्मान कार्ड होते हुए भी ईलाज से इंकार कर दिया. परिषद् के सदस्यों ने बताया कि गरीबों के लिए आयुष्मान योजना लायी गई है, ऐसे में अगर निजी अस्पताल अगर जिम्मेवारियों से भागती है, तो इस योजना के लाभुकों को दर- दर की ठोकरें खानी पड़ेगी. आपको बता दें कि कल जमशेदपुर के गोलपहाड़ी निवारी राजेश पात्रों के 12 वर्षीय पुत्र ने अपने पिता की गोद में ही ईलाज के अभाव में दम तोड़ दिया था. जिसको लेकर जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में जिले के उपायुक्त क्या संज्ञान लेते हैं, ये गौर करनेवाली बात होगी.

दूसरी ओर, जमशेदपुर के परसुडीह के खासमहल स्थित सदर अस्पताल में जाकर जुगसलाई विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायक मंगल कालिंदी द्वारा जुगसलाई विधानसभा के क्षेत्र के लोगों से मिले उनका हालचाल जाना और सदर अस्पताल के प्रबंधन से गोलपहाड़ी के सागर पात्रों के ट्रीटमेंट के दौरान देहांत हो जाने के विषय में बातचीत की. सारी जानकारी हासिल किये. उन्होंने कहा कि यह सरकारी लापरवाही का मामला है.
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क्या है पूरा मामला :
परसुडीह गोलपहाड़ी निवासी राजेश पात्रों के पुत्र सागर पात्रो के दिल में छेद है. राजेश चालक का काम कर अपना घर चलाते थे. सारी कमाई उन्होने अपने बेटे के इलाज में लगा दी. आयुष्मान कार्ड भी बनवाया पर आयुष्मान कार्ड से किसी भी अस्पताल में उसके बेटे का इलाज नहीं किया गया. सभी अस्पतालों ने यही जवाब दिया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा जिसके लिए रुपये लगेंगे. मदद के लिए उसने तत्कालिन मुख्यमंत्री रघुवर दास, सांसद विद्युत वरण महतो और सिविल सर्जन से भी गुहार लगाई पर किसी ने उसकी एक न सुनी. अंत में उसने उपायुक्त से मुलाकाल की. उपायुक्त के आदेश पर उसे 25 दिन के लिए मेडीट्रीना अस्पतालमें भर्ती कराया गया था जहां 13 दिनों तक इलाज करने के बाद अस्पताल प्रशासन ने इलाज करने से मना करते हुए बाहर इलाज करने को कहा. सोमवार को भी वह ठीक ही था. अचानक से उसकी तबियत बिगड़ी जिसके बाद उसे सदर अस्पताल ले जाया गया यहां से एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया गया.







