जमशेदपुर : मुसलमानों के खलीफा और इमाम हज़रत अली अलैहिस्सलाम का जन्मदिवस रविवार को धूमधाम से मनाया जाएगा. शहर में इसकी तैयारी चल रही है. कहीं महफिल आयोजित होगी तो कहीं गोष्ठी आयोजित कर हजरत अली के जीवन परिचय पर रोशनी डाली जाएगी. मानगो के जाकिरनगर स्थित इमामबारगाह हजरत अबू तालिब में शनिवार की रात को महफिले मिलाद का आयोजन होगा. यह महफिले मिलाद हसन की तरफ से आयोजित किया जा रहा है. इस महफिल में स्थानीय शायर हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शान में कसीदे पढेंगे. करीम सिटी कॉलेज के प्रोफेसर आले हाली ने बताया कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम के जन्मदिन के हवाले से हर साल महफिले मिलाद का आयोजन होता है. शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम ने बताया कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम काबे में पैदा हुए थे. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम के हाथों पर आंख खोली और सबसे पहले रसूले अकरम हजरत मोहम्मद स की जियारत की. उनके हाथों पर हजरत अली ने तौरेत, इंजील और कुरआन की तिलावत भी की. उनकी विलादत पर हर साल महफिले मिलाद का आयोजन होता है. करीम सिटी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ मोहम्मद रियाज ने कहा कि हजरत अली रजि अल्लाह तआला अनहो ने इस्लाम की तारीख में काफी अहम रोल अदा किया है. वह रसूले अकरम हजरत मोहम्मद मुस्तफा के साथ साए की तरह रहते थे. हिजरत की रात हज़रत अली अलैहिस्सलाम पैग़ंबरे अकरम हजरत मोहम्मद साहब के बिस्तर पर सोए. रसूले अकरम ने हजरत अली की शान में यह हदीस बयान फरमाई कि वह इल्म का शहर हैं और अली उसके दरवाजा हैं.



