जमशेदपुर: झारखण्ड मानवाधिकार सम्मेलन -जेएचआरसी की एक बैठक भुइयांडीह मे हुई, बैठक की अध्यक्षता मनोज मिश्रा ने की. बैठक में निजी क्लिनिकों में चिकित्सकों द्वारा ली जा रही परामर्श फीस को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई. जेएचआरसी के केंद्रीय अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा कि एक ही प्रकार की चिकित्सीय सेवा के लिए अलग-अलग डॉक्टर अपनी सुविधा के अनुसार अलग अलग फीस क्यों वसूलते है, जो सही नहीं है. इस दिशा मे अब तक सरकारी स्तर पर कोई फीस निर्धारण की समान नीति या अधिकतम सीमा क्यों तय नहीं की गयी है. मनोज मिश्रा ने इस महत्वपूर्ण विषय पर सरकार से क़ानून बनाने की मांग की है. जेएचआरसी ने सरकार से सवाल किया कि जब अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए नियामक व्यवस्था बनाई जा सकती है, तो स्वास्थ्य सेवा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निजी चिकित्सकों की परामर्श फीस के लिए स्पष्ट कानून क्यों नहीं बनाया जा रहा. (नीचे भी पढ़ें)
जेएचआरसी प्रमुख मनोज मिश्रा ने बताया कि क्लिनिकल स्टैंब्लीशमेंट एक्ट 2010 के नियमानुसार प्रत्येक निजी क्लिनिक के बाहर परामर्श शुल्क एवं अन्य शुल्कों की सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य है, परन्तु किसी भी क्लिनिक मे इसका पालन नहीं किया जाता है. जेएचआरसी ने इसे तत्काल लागु करने की मांग की है, ताकि मरीजों को पहले से शुल्क की पूरी जानकारी मिल सके. बैठक में कहा गया कि अत्यधिक चिकित्सा शुल्क के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के अनेक लोग समय पर इलाज नहीं करा पाते। जेएचआरसी ने सरकार से निजी क्लिनिकों में फीस निर्धारण, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कानूनी प्रावधान लागू करने तथा मरीजों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की. आज की बैठक मे मनोज मिश्रा के साथ सलावत महतो, अभिजीत चंदा, रेणु सिंह, एस के बसु, हरदीप सिद्दू, ऋषि गुप्ता, किशोर वर्मा, आर सी प्रधान, रीना देवी, सोमवारी, अंजू देवी उपस्थित थे.




