जमशेदपुर: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जमशेदपुर शहर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. महिलाओं को सम्मानित किया जा रहा है. उनकी यशोगाथा गाई जा रही है. बड़े-बड़े प्रोग्राम किया जा रहे हैं, लेकिन जो महिलाएं वास्तव में ही पीड़ित है, मजबूर हैं, बेबस है, उनके लिए कहीं कोई बात नहीं हो रही है.आज भी बारीडीह क्रिश्चियन बस्ती में रहने वाली महिलाएं और उनके परिवार सरकार के सभी सुविधाओं से वंचित है. टूटी-फूटी झोपड़ी, वृद्ध माता-पिता, न राशन कार्ड, न गैस चूल्हा, कुछ भी तो नहीं मिला है सरकार से इन लोगों को. किसी तरह नदी किनारे लकड़ी जलाती है और परिवार के लिए भोजन का इंतजाम करती है. (नीचे भी पढ़े)

वहीं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस होने के बावजूद भी इन्हें कोई आराम नहीं है. चाहे वह रेजा का काम हो, चाहे साफ- सफाई का काम हो, चाहे ईट भट्टा की मजदूरी हो.दूसरी ओर महिला सुरक्षा के साथ ही खिलवाड़ हो रहा है. छेड़छाड़ की घटना तो छोड़ दीजिए, सरेआम महिलाओं से पर्स की छिनतई हो रही है. गले के चेन छीनी जा रहे हैं और अपराधी खुले आम घूम रहे हैं. महिला सुरक्षा व्यवस्था एकदम गौण हो चुकी है.वहीं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जो सबसे अंतिम छोर की महिलाएं हैं, सरकार वहां भी कुछ सुविधा प्रदान करें ,वह भी आज तक संभव नहीं हो पाया है.(नीचे भी पढ़े)

जो महिलाएं किसी तरह संघर्ष करके बुलंदियों को छुए है, चाहे वह खेल का मैदान हो या पढ़ाई का क्षेत्र हो या फिर बिजनेस और समाजसेवा का क्षेत्र हो, वैसे ही महिलाओं को इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मान मिल पाता है, जबकि दबी कुचली महिलाओं के लिए अब तक कुछ नहीं किया जा सका है. सरकार को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है.







