जमशेदपुर: जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बर्न यूनिट के चिकित्सकों ने एक जटिल और दुर्लभ चिकित्सा मामले में असाधारण सफलता हासिल करते हुए 13 वर्षीय किशोर रातू गागराई को नया जीवन प्रदान किया है. चक्रधरपुर के गोपीनाथपुर (लोजोरा कलां) निवासी रातू 14,000 वोल्ट के हाई-टेंशन बिजली तार के संपर्क में आने से 60 से 70 प्रतिशत तक गंभीर रूप से झुलस गया था. उसका चेहरा, बायां हाथ, दोनों पैर और पीठ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे और वह बेहोशी तथा सीवियर हाइपोवोलेमिक शॉक की नाजुक स्थिति में अस्पताल पहुंचा था. (नीचे भी पढ़ें)
अस्पताल के बर्न यूनिट प्रभारी सह एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर ललित मिंज और उनकी टीम ने तुरंत सघन आपातकालीन उपचार शुरू करते हुए मरीज की स्थिति को स्थिर किया. संक्रमण और जख्म की गंभीरता को देखते हुए दोनों घुटनों के नीचे का हिस्सा काटना पड़ा. मरीज के शरीर पर खुद की त्वचा उपलब्ध न होने के कारण डॉक्टरों ने अनूठी पहल करते हुए किशोर की मां (बारीलता गागराई) की त्वचा लेकर होमोग्राफ्ट (स्किन ग्राफ्टिंग) के जरिए खुले घावों को ढका. सफल सर्जरी, निरंतर देखभाल और कृत्रिम पैर (प्रोस्थेसिस) लगाए जाने के बाद अब किशोर अपने पैरों पर चलने में सक्षम हो गया है. इस सफल उपचार में डॉक्टर ललित मिंज के नेतृत्व में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टर गायत्री व डॉक्टर शरण्या, सहायक चिकित्सक डॉक्टर रितेश झा, डॉक्टर सोनाली, डॉक्टर बुलबुल तथा बर्न यूनिट और ओटी के समस्त नर्सिंग स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही.







