जमशेदपुर: जमशेदपुर के मानगो डिमना चौक स्थित एमजीएम अस्पताल में सिलिकोसिस मरीजों की जांच प्रक्रिया को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला में कोलकाता से आये ईएसआईसी (ESIC) के पूर्व चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. कुणाल कुमार दत्ता और डॉ. श्रेष्ठा सेन गुप्ता ने उपस्थित डॉक्टरों को सिलिकोसिस की पहचान और जांच के आधुनिक तरीकों की विस्तृत जानकारी दी. कार्यशाला के दौरान दोनों विशेषज्ञ डॉक्टरों ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से सिलिकोसिस रोग की जांच के विभिन्न चरणों, लक्षणों की पहचान, और जांच के समय अपनाए जाने वाले प्रोटोकॉल पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि सिलिकोसिस फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जो खदानों, पत्थर काटने और निर्माण कार्य जैसे व्यवसायों में काम करने वाले मजदूरों को अधिक प्रभावित करती है। इस बीमारी की सही जांच और शुरुआती पहचान से मरीजों को लंबे समय तक जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है. (नीचे भी पढ़ें)
एमजीएम अस्पताल के मेडिसिन, टीबी-चेस्ट, एफएमटी, पीएसएम और रेडियोलॉजी विभागों के डॉक्टरों ने इस प्रशिक्षण सत्र में भाग लिया. इस अवसर पर विशेषज्ञों ने उपस्थित डॉक्टरों को बताया कि एक्स-रे, सीटी स्कैन और स्पाइरोमेट्री जैसी जांचों के परिणामों को सही ढंग से समझना और उनका क्लिनिकल विश्लेषण करना सिलिकोसिस की पहचान में अत्यंत जरूरी है. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान मरीज की पेशेगत पृष्ठभूमि, सांस लेने में तकलीफ, खांसी, और फेफड़ों में फाइब्रोसिस जैसी स्थिति का मूल्यांकन भी किया जाना चाहिए. कार्यशाला के आयोजन में सामाजिक कार्यकर्ता समित कुमार कार की भूमिका सराहनीय रही, जिन्होंने सिलिकोसिस पीड़ितों के लिए वर्षों से संघर्ष किया है. उन्होंने ही कोलकाता के दोनों विशेषज्ञ डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने के लिए आमंत्रित किया था. (नीचे भी पढ़ें)
एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आर.के. मंधान ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कोलकाता से आये विशेषज्ञों को कुछ सिलिकोसिस संदिग्ध मरीजों के एक्स-रे भी दिखाए गए, जिन पर व्यावहारिक चर्चा की गई. उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं डॉक्टरों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं, क्योंकि इससे उन्हें फेफड़ों से जुड़ी व्यावसायिक बीमारियों की पहचान में दक्षता मिलती है. कार्यशाला के अंत में सभी उपस्थित डॉक्टरों ने प्रशिक्षण के लिए डॉ. दत्ता और डॉ. सेन गुप्ता का आभार जताया और भविष्य में भी इस तरह के उपयोगी सत्र आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया.




