
जमशेदपुर : जमशेदपुर के डिमना स्थित एमजीएम अस्पताल में रविवार को इलाज के दौरान एक महिला मरीज की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया. घटना मेडिसिन विभाग की चौथी मंजिल की है. सूचना मिलने पर होमगार्ड के जवान मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर स्थिति को शांत कराया. इसके बाद शाम करीब साढ़े चार बजे परिजन शव लेकर घर रवाना हो गए. मृतका की पहचान बिष्टुपुर हरिजन बस्ती निवासी 56 वर्षीय गीता मुखी के रूप में हुई है. ( नीचे देखे पूरी खबर )
घटना के समय मेडिसिन विभाग में केवल एक डॉक्टर और एक नर्स के मौजूद होने की बात सामने आई है. मृतका के पुत्र ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले पुराने एमजीएम अस्पताल में इलाज के दौरान उनके पिता की मौत हुई थी और अब उनकी मां की भी जान चली गई. उनका आरोप है कि स्लाइन हटाकर इंजेक्शन देने के तुरंत बाद उनकी मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई और कुछ ही मिनटों में उनकी मौत हो गई. परिजनों के अनुसार, गीता मुखी को पिछले सोमवार कमजोरी की शिकायत के बाद एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें रक्त भी चढ़ाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. अस्पताल के अनुसार, गीता मुखी को 20 जुलाई को अत्यधिक कमजोरी की शिकायत के साथ भर्ती कराया गया था. जांच में उनका हीमोग्लोबिन 7.6 ग्राम पाया गया था और वे किडनी सहित अन्य गंभीर बीमारियों से भी पीड़ित थीं. इलाज के दौरान उन्हें रक्त चढ़ाया गया था. अस्पताल का कहना है कि स्लाइन के दौरान नस जाम होने से दवा का प्रवाह रुक गया था, जिसके बाद आवश्यक इंजेक्शन दिया गया. प्रबंधन के मुताबिक, मरीज की हालत पहले से ही अत्यंत गंभीर थी और तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई.







