जमशेदपुर: जमशेदपुर के डिमना चौक स्थित एमजीएम अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था गंभीर रूप से सुरक्षा कर्मियों की कमी से प्रभावित है. अस्पताल में 90 सुरक्षा जवानों का मानदेय भुगतान किया जाता है, लेकिन वर्तमान में केवल 81 जवान ही कार्यरत हैं. इनमें से 3 जवान पीजी हॉस्टल और 6 जवान साकची स्थित पुराने एमजीएम अस्पताल परिसर में तैनात हैं. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पूरे परिसर की प्रभावी सुरक्षा के लिए 220 जवानों की आवश्यकता है. इस संबंध में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय को पहले ही प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है. वर्तमान में कार्यरत 81 जवानों में जनरल शिफ्ट के अलावा ए, बी और सी शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाती है. ए शिफ्ट में 21 जवान, जबकि बी और सी (नाइट) शिफ्ट में 20-20 जवान तैनात रहते हैं. (नीचे भी पढ़ें)

रात की पाली में इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर, अस्पताल और कॉलेज के मुख्य प्रवेश द्वार, पूछताछ केंद्र, विभिन्न गेटों तथा पेट्रोलिंग की जिम्मेदारी इन्हीं सीमित जवानों पर रहती है. एक सुरक्षा जवान के अनुसार अस्पताल की सातवीं मंजिल से ग्राउंड फ्लोर तक पूरे परिसर की पेट्रोलिंग कर वापस आने में करीब ढाई घंटे लग जाते हैं. ऐसे में पूरी रात में अधिकतम दो बार ही प्रभावी गश्त संभव हो पाती है. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं, किसी वार्ड से नर्स या डॉक्टर की आपात सूचना मिलने पर जवानों को तुरंत वहां पहुंचना पड़ता है, जिससे अन्य हिस्सों की निगरानी प्रभावित होती है. सूत्रों के मुताबिक अस्पताल से मरीजों के लापता होने की अधिकांश घटनाएं रात के समय होती हैं. अस्पताल परिसर से बाहर निकलने के कई रास्ते होने और सुरक्षा कर्मियों की कमी के कारण पूरे परिसर की प्रभावी निगरानी करना मुश्किल हो जाता है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.







