जमशेदपुर : पीएफ कार्यालय में कंसलटेंट प्रसेनजीत घोष ने सिस्टम के लूप होल्स (खामियों) का फायदा उठाकर करोड़ों का घोटाला कर लिया. जानकारी के अनुसार ‘आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना’ के पैसे गलत तरीके से शेल कंपनी बनाकर प्राप्त किए और लगभग एक करोड़ 20 लाख की निकासी भी कर ली. ये पकड़ में तब आया जब सेंट्रल सर्वर में गड़बड़ी पकड़ाई. जितनी भी शेल कंपनियां बनाई गईं उन सबके प्रोपराईटर प्रसेनजीत घोष निकले जो जांच की वजह बनी. लेकिन स्थानीय जमशेदपुर पीएफ कार्यालय में ये गड़बड़ी कोई पकड़ नहीं पाया. हालांकि ये तो जांच के बाद पता चलेगा कि स्थानीय स्तर पर घोटाले में किसी की मिलीभगत है या नहीं लेकिन जानकारी के मुताबिक ऑनलाइन फर्जी कंपनियों की जांच को लेकर स्थानीय स्तर पर कोई सिस्टम डेवलेप नहीं है. ये जो घोटाला सामने आया है वह भी सेंट्रल सर्वर के माध्यम से पकड़ में आया और केंद्रीय विभाग के निर्देश पर जमशेदपुर में जांच के आदेश दिए गए. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सबसे पहले पुणे में इस तरह की गड़बड़ी की सूचना मिली जिसके बाद धीरे धीरे अन्य जगहों में भी गड़बड़ियों की सूचना मिली. लूप होल्स यह है कि जब ऑनलाइन शेल कंपनियां बना ली गईं तब बगैर ठोस जांच के योजना के पैसे खाते में डाल दिए गए. आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में लगभग 59 लाख खातों में लगभग 5000 करोड़ की राशि डाली गई. यानि सरकार की ओर से राशि डालने से पहले कंपनियों की जांच नहीं हुई. कहीं न कहीं घोटाला करने वालों को इस लूपहोल्स की जानकारी थी कि कोविड काल में लाई गई इस योजना में आसानी से बड़े पैमाने पर राशि मिलने की संभावना है. हालांकि अब देशव्यापी विभागीय जांच शुरू हो गई है. वहीं शुक्रवार को जमशेदपुर पीएफ कार्यालय के कमिश्नर टीके मुखर्जी ने फोन पर बताया कि घोटाले की कोई प्राथमिकी स्थानीय थाने में दर्ज नहीं कराई गई है. आगे चलकर देशव्यापी सीबीआई जांच हो सकती है. योजना के नियम के मुताबिक 1000 से कम कर्मचारी वाली कंपनी को 24प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिलता है, यानि कर्मचारियों के वेतन के अनुसार 12 फीसदी और संस्था या कंपनी के हिस्से का भी 12 फीसदी सरकार भविष्य निधि (इपीएफओ) के तहत जमा करती है. 1000 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनी को 12 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है. अब घोटाले के आरोप के घेरे में आए प्रसेनजीत ने जो शेल कंपनियां बनाई उसमें कर्मचारियों की संख्या 1000 से कम रखकर 24 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ लिया. उसके लिए लगभग 3000 लोगों के आधार या बैंक खाते का इस्तेमाल किया गया. ये तीन हज़ार लोग कौन हैं, मनरेगा मज़दूर हैं या कौन हैं, इसका खुलासा जांच के बाद हो पाएगा. लेकिन सवाल तो सिस्टम पर है कि कोई बैठे-बैठे किसी के भी आधार या खाते की डिटेल के साथ उसे अपनी फर्जी कंपनी का फर्जी कर्मचारी बनाकर लाभ ले लेता है. बिना लूप होल्स के कैसे बहुत सारी कंपनियां फर्जी तरीके बन जाएगी और हजारों लोगों के आधार का इस्तेमाल कर लिया जाएगा. ढंग से जांच होगी तो घोटाले की रकम एक करोड़ बीस लाख से कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि इतनी रकम की तो निकासी हुई है.
प्रसेनजीत ने जांच टीम के समक्ष अपराध स्वीकारा, कहा-अकेले नहीं किया घोटाला
जानकारी के अनुसार जमशेदपुर पीएफ कार्यालय की अंदरूनी जांच टीम के समक्ष प्रसेनजीत घोष ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए शुक्रवार को पांच लाख जमा कर दिए हैं और आगे धीरे-धीरे और पैसे लौटाने की बात कही है. उसने जांच टीम को बताया कि उसने अकेले घोटाले को अंजाम नहीं दिया है. शेल कंपनियां बनाने के लिए 3000 लोगों के आधार/खाते के लिए ठेकेदारों और अन्य लोगों के सहयोग लिए गए. इन खातों में मनरेगा मजदूर भी शामिल हैं जिनको संभवतया कोई जानकारी भी नहीं. वहीं ठेकेदारों और शामिल अन्य लोगों के साथ 60-40 की डील हुई थी. इतने लोगों के डाटा को एकत्रित करना और फर्जी तरीके से उनको कर्मचारी बनाने के काम में काफी वक्त लगा. जांच टीम प्रसेनजीत की 17 शेल कंपनियों समेत कुल 122 कंपनियों की जांच कर रही है जो अन्य लोगों की है. चूंकि प्रसेनजीत घोष ने अकेले ही 17 शेल कंपनियां बना ली तो पकड़ में आ गया, आगे और खुलासे होंगे. कई लोगों ने एक-एक कंपनी भी बनाई है. ये सभी जांच के घेरे में हैं. इनमें कई सही भी हो सकती हैं.






