
मुसाबनी : वाहवाही लूटने के लिए रोज किसी न किसी गांव को ओडीएफ ग्राम घोषित किया जा रहा हैं. इन घोषित ओडीएफ गांवों में पूर्ण रूप से शौचालय निर्माण हुआ हो या उसका सही उपयोग हो रहा हो, ऐसा नहीं है. मुसाबनी प्रखण्ड के माटीगोड़ा ग्राम पंचायत वार्ड 4 व 6 के गुर्बाडीह गांव में लगभग चार साल से शौचालय अधूरे हैं. यहां के लोगों को शौचालय निर्माण को लेकर कई सपने भी दिखाये गये हैं, पर आज भी इस वार्ड में अनेक शौचालय अधूरे पड़े हैं. साथ ही अनेक लोगों के शौचालय बने तक नहीं हैं. हंबीर सोरेन, राम कल्याण महतो, उषा नायक, सुनिता नायक जैसे कई ग्रामीणों के घरों में शौचालय नहीं बने हैं. वहीं निर्माण किए गए शौचालय में अब तक चैम्बर व पैन तक नही लगाया गया है. वहीं निर्माण किए गए शौचालय भी अत्यंत घटिया बने है. जिसमें मैटेरियल तो घटिया उपयोग किया गया है, साथ ही इसमें लगाए गए दरवाजे भी घटिया क्वालिटी के हैं. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अब तक जितने भी शौचालय निर्माण में सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है उन्होंने खुद अपने पैसे से किया है. (नीचे भी पढ़ें)

उषा नायक ने बताया कि मुखिया कार्तिक हेम्ब्रम द्वारा एक रूपया भी शौचालय के नाम पर नहीं दिया गया है. ऊपर से कई अधिकारियों को जांच के दौरान मेरे शौचालय का फोटो लेने को कहा गया तो मैने लौटा दिया और कहा कि जब शौचालय पूर्ण रूप से तैयार है ही नहीं तो फोटो किस बात का लीजिएगा. सुनिता नायक ने कहा कि मुखिया व अन्य लोग सिर्फ फोटो लेकर चले गए और कहा गया कि जल्द ही शौचालय निर्माण कर दिया जाएगा, परंतु चार साल से ज्यादा समय बीत गया अब तक शौचालय का निर्माण नहीं किया गया है. वहीं 72 वर्ष के बुर्जुग राम कल्याण महतो ने कहा कि मुझ बूढ़े को तो डरा-धमका कर जबरन फोटो खिंचवाया गया है. कहा गया कि अगर फोटो नही खिंचवाते है तो तुम पेंशन, राशन कार्ड आदि से वंचित रहोगे. कहा कि फोटो तो ले गये परंतु अब तक पेंशन व राशन कार्ड तक नसीब नहीं हुआ है. (नीचे भी पढ़ें)
कमाई के लिए घटिया निर्माण : हंबीर सोरेन, राम कल्याण महतो, उषा नायक, सुनिता नायक जैसे कई ग्रामीणों का आरोप है कि मुखिया, इंजीनियर, जांच अधिकरी ने अपनी कमाई के लिए घटिया मैटेरियल लाकर जबरदस्ती ग्रामीणों पर थोपे हैं एवं अपनी मनमानी से निर्माण कराया है. जबकि अगर संबंधित ग्रामीण को ही निर्माण करने को कहा जाता, तो निश्चित ही गुणवत्ता युक्त शौचालय बनाते. हालांकि यहां के मुखिया समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने वाहवाही लूटने एवं अपनी जेबें गर्म करने के लिए इसमें 14वें वित्त सहित पंचायत के अन्य मदों का उपयोग किया. जिससे पंचायत के अन्य विकास एवं जरूरी कार्य थम गए हैं. बावजूद यहां की स्थिति देखते हुए ओडीएफ के नाम से भी सफल नहीं लग रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं इस संबंध में शौचालय निर्माण कार्य के जूनियर इंजिनियर सह जांच अधिकारी शीतल महापात्र ने कहा कि मैने जांच करने के बाद पूरी रिर्पाट प्रखण्ड कार्यालय में सौप दी है. यह काफी साल पुराना मामला है. इसकी पूरी जानकारी मेरे पास नही हैं. डीडब्लूएसडी के एक्सक्यूटिव इंजीनियर अभय टोपो ने कहा कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है. जल्द ही अधिकारियों को स्थल पर भेजकर जांच करवायी जायेगी. समस्या का समाधान किया जाएगा व दोषी लोगों पर कार्यवाही भी की जाएगी.





