रांची : सरना धर्म कोड को लागू करने की मांग को लेकर आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से राजधानी रांची स्थित झारखंड के राजभवन के सामने धरना दिया गया. इस धरना का नेतृत्व आदिवासी सेंगेल अभियान के प्रमुख पूर्व सांसद सालखन मुर्मू समेत अन्य लोगों ने हिस्सा लिया. इस दौरान इन लोगो ने राजभवन के सामने कांग्रेस, झामुमो, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल का पुतला दहन किया. इस दौरान इन लोगों ने नारा लगाया कि हेमंत सोरेन जवाब दों, नहीं तो गद्दी छोड़ो. इन लोगों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप लगाया कि उन्होंने सरना धर्म कोड की जगह सरना आदिवासी धर्म कोड 11 नवंबर 2020 को पारित करके बिना राज्यपाल के हस्ताक्षर के दिल्ली भेजा है. केवल लटकाने, भटकाने और तुष्टिकरण के लिए ऐसा किया गया है. इसके अलावा मारंग बुरू (पारसनाथ पहाड़, गिरिडीह, झारखंड) को भारत सरकार को 5 जनवरी 2023 को पत्र लिखकर जैनों के हाथों में बेचने का काम किया है, पंडित रघुनाथ मुर्मू के जन्म जयंती पर 5 मई 2023 को उनके डांडबुस गांव, ओडिशा जाकर उनके सपनों को अपमानित ही किया है क्योंकि आपने झारखंड में संताली भाषा को ओलचिकी लिपि के साथ अभी तक राजभाषा का दर्जा नहीं दिया है. (नीचे भी पढ़ें)
सालखन मुर्मू ने कहा कि उल्टा आपके अनेक ईसाई एमएलए और एमपी इसका विरोध भी करते हैं. सालखन मूर्मू ने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार ने कुर्मी या महतो समुदाय को आदिवासी बनाने का 8 फरवरी 2018 को अनुशंसा हस्ताक्षर करके असली आदिवासियों के गले में फांसी का फंदा लटकाने का काम किया है. आदिवासी स्वशासन व्यवस्था में जनतांत्रिक और संवैधानिक सुधार लाने के बदले वंशानुगत नियुक्त माझी परगाना, मानकी मुंडा आदि को प्रलोभन देकर अपने वोट बैंक की सुविधा के लिए उनको भटकाने का काम करते हैं. इन लोगों ने कहा है कि आदिवासी सेंगेल अभियान 30 जून को कोलकाता ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आहूत विश्व सरना धर्म कोड जनसभा में भी लाखों लोगों के बीच आपके खिलाफ उपरोक्त 5 सवालों को उठाने के लिए बाध्य है. चूंकि उपरोक्त 5 सवाल भारत के आदिवासियों के अस्तित्व, पहचान, हिस्सेदारी के साथ जुड़ा हुआ है. सरना धर्म कोड को हर हाल में 2023 में लेने के लिए बृहद आदिवासी एकता और निर्णायक जनांदोलन की अनिवार्यता है. इसके लिए रांची में 26 मई को सरना एकता बैठक का आयोजन किया जायेगा. सभी सरना संगठन और बुद्धिजीवियों को आमंत्रित किया जायेगा.




