
जमशेदपुर : झारखंड में आंदोलनकारियों की सरकार है. आंदोलन से ही उपजी झामुमो की सरकार है और सरकार के मुखिया भी झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की है. लेकिन यह महज संयोग है या दुर्भाग्य की इस सरकार में चार माह से आंदोलनकारियों को मिलने वाला पेंशन नहीं मिल पा रहा है. चार माह से यह हालात है. पहले से ही दो माह से लॉकडाउन के कारण लोगों की हालत खराब है और आंदोलनकारियों को चार माह से पेंशन नहीं मिलना मुश्किल हालात पैदा कर चुका है. इस मुश्किल हालात को देखते हुए आंदोलनकारियों की आवाज सरकार तक ही अब नहीं पहुंच पा रही है. वैसे मिली जानकारी के अनुसार पूर्वी सिंहभूम जिले में 250 से अधिक आंदोलनकारी है, जिनकी आर्थिक हालात ठीक नहीं है और लगातार लोग परेशान भी है. हालांकि, इस मुद्दे को बहरागोड़ा के पूर्व विधायक और भाजपा के युवा नेता कुणाल षाड़ंगी ने उठाया है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से किसी तरह का कोई कदम का ऐलान नहीं किया गया है. बहरागोड़ा के पूर्व विधायक ने ट्विटर के माध्यम से झारखंड की सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि झारखंड के आंदोलनकारियों के बड़े स्वघोषित हितैषी कहां है, जबल सरकार का शुरू कराया गया पेंशन अबतक आंदोलनकारियों को ही नही मिल पाया है. सरकार के अलावा अपनी पार्टी के आला नेताओं का भी उन्होंने इसके माध्यम से ध्यान आकृष्ट कराया है. वैसे यह पूरा मामला सिस्टम पर सवाल जरूर उठाता है कि किस कदर सरकारें घोषणाएं करके अपनी वाहवाही तो ले लेता है, लेकिन फिर उसको लागू नहीं करती है और लाभांवित तक सुविधाएं नहीं पहुंच पाती है. घोषणा और डिलीवरी सिस्टम में काफी अंतर है.







