
देवघर से ऋतुराज
देवघर : झारखंड में आयुष चिकित्सक अपने 7 सूत्री मांगों के समर्थन में 8 जून से ही आंदोलनरत हैं. चिकित्सक संघ ने 8 जून से 12 जून तक चले अपने सांकेतिक आंदोलन को पूर्णतः सफल बताया है. इस दौरान झारखंड के लगभग सभी जिलों के आयुष चिकित्सक द्वारा काफी बढ़-चढ़कर इस आंदोलन में भाग लिया गया. संघ द्वारा अपनी मांगों को सरकार के हर स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की गई है. संघ के पदाधिकारियों द्वारा 10 जून को जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ तथा पुनः 11 जून को सभी आयुष चिकित्सा पदाधिकारी एवं सदस्यों के साथ ऑनलाइन बैठक कर आंदोलन को आगे बढ़ाने और सरकार पर दबाब बनाने की रणनीति पर विमर्श किया गया. बैठक में बहुमत के आधार पर तय किया गया कि वर्तमान वैश्विक आपदा में जनहित तथा मानवता को ध्यान में रखते हुए कार्य बहिष्कार कर हड़ताल में जाना उचित नहीं है. साथ ही आंदोलन को अन्य रूप में आगे ले जाने की सहमति प्रदान की गई. सक्रिय आंदोलन के लिए छूटे हुए आयुष चिकित्सकों को भी साथ जोड़ने और सभी को एक प्लेटफार्म पर लाने के लिए प्रयास करने की बात की गई. संघ द्वारा सभी सदस्यों की बातों को ध्यान में रखते हुए आंदोलन को आगे 13 जून से 3 जुलाई तक विस्तारित करने का फैसला किया गया. इसके तहत “समर्थन जुटाओ अभियान” को 13 जून से 3 जुलाई तक सभी जिला के संघ के सभी पदाधिकारी एवं सदस्यों द्वारा अपने क्षेत्र के सभी सांसद, विधायक, सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के नेता और अन्य वरिष्ठ नेता से मिलकर अपनी मांगों को लेकर लिखित समर्थन प्राप्त करने का निर्णय लिया गया. आंदोलन के क्रम में 25 जून को “कैंडल मार्च” निकालने का निर्णय लिया गया. इसके लिए सभी संबंधित विभाग को लिखित सूचना देते हुए सभी जिला मुख्यालय में सिविल सर्जन कार्यालय से उपायुक्त कार्यालय तक कैंडल मार्च निकालने का निर्णय लिया गया. साथ ही 3 जुलाई को सभी आंदोलनरत आयुष चिकित्सकों द्वारा “भिक्षाटन” कर विरोध प्रकट किया जाएगा. संघ के अनुसार इस तरह के कार्यक्रमों को एक दूसरे के सहयोग से पूर्णरूप सफल बनाया जाएगा और सरकार तक सशक्त रूप से अपनी मांगो को पहुंचाने की कोशिश को कामयाब बनाया जाएगा और इससे सरकार की चिरनिद्रा भी भंग होगी.






