रांची/जमशेदपुर : झारखंड सरकार पर संकट के बादल की आशंकाओं के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई दुमका से विधायक बसंत सोरेन की ही विधायकी जाने की स्थिति नजर आ रही है. दरअसल, चुनाव आयोग ने डबल ऑफिस ऑफ प्रोफिट के मामले में सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख ली है. इस बीच विपक्ष में फैसला आने के पहले से ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी झामुमो के साथ-साथ सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है. सारे विधायकों को झारखंड में ही रहने की हिदायत दी गयी है. कभी भी फैसला आ सकता है, लिहाजा इसको लेकर प्लान बी भी तैयार किया गया है. इस बीच भाजपा के चर्चित गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने कह दिया है कि सितंबर माह में फिर से दुमका और बरहेट में चुनाव होगा. इसको लेकर उन्होंने ट्विटर पर ही इसका नया राग छेड़ दिया है. इससे पहले भी गोड्डा भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की भविष्यवाणी सही साबित होती रही है, लिहाजा, झारखंड का सत्ता पक्ष इसको लेकर अलर्ट के मोड में है. दरअसल, कानून के जानकारों ने भी झामुमो और सत्ताधारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को यह सलाह दी है कि अगर कोई विरोध में फैसला आता है तो इसके लिए प्लान-बी भी तैयार रखे ताकि आपात हालत में मुख्यमंत्री को बदला जा सके. वैसे कानून कहता है कि अगर कोई व्यक्ति विधायक नहीं रहता है तो छह माह तक बिना विधायक बने भी कोई मुख्यमंत्री या मंत्री रह सकता है, लेकिन बशर्तें उनको छह माह के भीतर चुनाव लड़कर जीतना होगा और विधायक बनना होगा. यहां विधान परिषद नहीं है, लिहाजा विधानसभा चुनाव लड़कर ही जीतना मजबूरी होगी. ऐसे में झारखंड मुक्ति मोर्चा इस तैयारी में भी है कि कोई ऐसी सीट को खाली करा लिया जाये, जहां से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चुनाव लड़ाकर जीता लिया जाये ताकि मुख्यमंत्री का पद बचा रह जाये और फिर से चुनाव की तैयारी भी कर लिया जाये. आपको बता दें कि बरहेट विधानसभा और दुमका सीट से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी. बाद में दुमका सीट को उन्होंने छोड़ दिया था और अपने स्थान पर अपने भाई बसंत सोरेन को चुनाव लड़ाया था. बसंत सोरेन और हेमंत सोरेन पर खनन लीज मामला और दो-दो जगहों से मुनाफा के पद को संभालने का आरोप लगाते हुए एक शिकायत भाजपा ने चुनाव आयोग से की थी. इस शिकायत के बाद सुनवाई पूरी हो गयी है. अब सुनवाई के बाद फैसला को सुरक्षित रख लिया गया है. कभी भी इसको लेकर फैसला आ सकता है. ऐसे में प्लान-बी तैयार है. प्लान बी में एक और योजना है कि अगर मुख्यमंत्री के तौर पर हेमंत सोरेन को हटाना ही पड़ा तो आपात स्थिति में किसी तरह हेमंत सोरेन के करीबी सरायकेला से झामुमो विधायक चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. ये तीन प्लान पर काम किया जा रहा है. कांग्रेस भी इसको लेकर पूरी तरह सतर्क है.






