
चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले का सबसे घना जंगल सारंडा को एसिया का सबसे घना जंगल है, लेकिन यहां सैकड़ों राजस्व गांव भी है. इन गांवों में से ही एक है गुदड़ी थाना क्षेत्र का बुरुगुलीकेरा गांव, जहां रविवार को सात लोगों को पत्थलगढ़ी के तहत आमसभा के फैसले के आधार पर मार डाला गया. इन सात लोगों की मौत के तीसरे दिन पुलिस को शव मिल पाया और हत्या की पुष्टि हो पायी. लेकिन इस हत्या के पीछे सरकार की विफलता ही है. झारखंड गठन के 20 साल हो चुके है, लेकिन इन गांवों में कोई सुविधा तक नहीं पहुंच पायी है.

आप सोनुवा और गोईलकेरा की मुख्य सड़कों को छोड़कर अगर सारंडा के जंगलों में जायेंगे तो हकीकत मालूम चल जायेगा कि सरकार नाम की चीज कहां तक पहुंची है. हालात यह है कि सड़कें तक नहीं है. सड़कें जो बनायी गयी थी, वह पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के कार्यकाल में उस क्षेत्र में बनायी गयी थी, लेकिन वह सारी सड़कें भी अब टूटती नजर आ रही है. सड़कें टूटी हुई है और लोगों के पास अनाज तक नहीं पहुंचता है. हालात यह है कि वहां के लोग पानी पीने के लिए कोसों दूर नाले का पानी लाने जाते है और तब जाकर वे लोग पानी पीते है. जो पानी पीते है, उससे पहले नहा लेते है और फिर से पानी ले लेते है. खेती तक बंजर है और कुछ लोग कुछ सरसो वगैरह उगाते भी है तो किसी तरह अपना जीवन बसर कर पाते है.

खुद उगाते है और खुद खाते है. तन ढंकने के लिए कपड़े तक नहीं है. गरीबी ही गरीबी है. पुलिस के नाम पर थाना तो है, लेकिन वहां कोई मोबाइल नेटवर्क तक काम नहीं करता है. पुलिस बेबस दिखती है. नक्सलियों ने अपने पांव जमा लिये है. पुलिस अपने आपको ही सुरक्षित रखने में लगी रहती है. बेचारी झारखंड पुलिस के जवान वहां से खाना पीना लाने और ले जाने में ही उनके पसीने छूटे रहते है तो वहां दूध और पानी का भी अभाव पुलिसवाले खुद झेलते है. गुड़िया थाना की ही बात की जाये तो वहां बीएसएनएल का टावर किसी तरह आता है और कभी नहीं आता है. इसके अलावा कोई भी नेटवर्क तक काम नहीं करता है. गुड़िया के सीओ-बीडीओ कार्यालय के साथ गुड़िया थाना के नये भवन का उदघाटन करने के लिए दो साल पहले (28 जनवरी 2018) मुख्यमंत्री रहते हुए रघुवर दास गये थे. हेलीकॉप्टर से वे खुद गये थे और वादा किया था कि वहां जीओ का नेटवर्क जरूर लगाया जायेगा ताकि कनेक्टिविटी बेहतर हो सके, लेकिन आज तक वहां कोई मोबाइल नेटवर्क तक नहीं लग सका.

झारखंड पुलिस के जवान वहां से आने जाने के लिए कैसे आयेंगे, यह सोचते है और बगल में ही सीआरपीएफ का कैंप है, जिसका हेलीकॉप्टर आता है और उनको सामान देकर जाता है और उनको लेकर भी चले जाता है. सुदूरवर्ती इलाका होने और सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस एलआरपी पर नाम मात्र ही निकलती है, लेकिन आज तक पुलिस को कभी गश्ती करते भी नहीं देखा गया है. सेरेंगदा के पास एक इंडियन रिजर्व बटालियन (आइआरबी) का कैंप भी है तो गुदड़ी थाना के पास सीआरपीएफ का भी कैंप है. सीआरपीएफ का कैंप डैम के पास भी तो है, लेकिन घनघोर जंगल के बीच गांवों में अपनी उपस्थिति पुलिस दर्ज नहीं करा पायी है और सरकार के विकास के दावे खोखले वहां साबित होते नजर आते है.








